पुस्तकालय पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय जनकपुरी
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Prayas - May 2026
Year - 7 Month - May 2026 Issue - 77
मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,
जीवन एक सुंदर यात्रा है। इस यात्रा में हर दिन हमें कुछ नया सीखने, समझने और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। विद्यार्थी जीवन इस पूरी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, क्योंकि यही वह समय है जब हम अपने भविष्य की नींव रखते हैं। आज जो आदतें, विचार और मेहनत आप अपनाते हैं, वही आने वाले वर्षों में आपकी पहचान बनते हैं।
आज मैं आपसे केवल पढ़ाई की बात नहीं करूँगा, बल्कि उस सोच की बात करूँगा जो किसी साधारण विद्यार्थी को असाधारण बना देती है।
बहुत बार हम अपने जीवन में कठिनाइयों से घिर जाते हैं। कभी परीक्षा का डर, कभी कम अंक आने का दुख, कभी दूसरों से तुलना, तो कभी यह चिंता कि “क्या मैं सफल हो पाऊँगा?” लेकिन याद रखिए — सफलता केवल तेज दिमाग वालों को नहीं मिलती, बल्कि उन लोगों को मिलती है जो हार मानना नहीं जानते।
एक छोटी-सी चींटी को देखिए। वह बार-बार गिरती है, लेकिन रुकती नहीं। वह हर बार उठती है और फिर कोशिश करती है। अंत में वही चींटी अपने लक्ष्य तक पहुँच जाती है। प्रकृति हमें हर दिन यह सिखाती है कि लगातार प्रयास करने वाला व्यक्ति कभी असफल नहीं होता।
विद्यार्थियों, आपके अंदर अपार शक्ति है। कभी भी खुद को कमजोर मत समझिए। दुनिया का हर महान व्यक्ति कभी न कभी एक साधारण विद्यार्थी ही था।
A. P. J. Abdul Kalam बचपन में अखबार बाँटते थे, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को छोटा होने नहीं दिया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और आगे चलकर भारत के “मिसाइल मैन” बने।
Swami Vivekananda ने कहा था — “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन बदल देने वाला मंत्र है।
आज का समय प्रतियोगिता का समय है। हर जगह प्रतिस्पर्धा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप डर जाएँ। तुलना करने से आत्मविश्वास कम होता है। हर विद्यार्थी की अपनी अलग क्षमता होती है। कोई पढ़ाई में अच्छा है, कोई खेल में, कोई संगीत में, कोई कला में। इसलिए कभी भी खुद को दूसरों से कम मत समझिए।
याद रखिए, सूरज और चाँद दोनों चमकते हैं, लेकिन अपने-अपने समय पर। उसी प्रकार आपकी सफलता भी सही समय पर अवश्य आएगी।
कई विद्यार्थी सोचते हैं कि केवल अच्छे अंक ही सफलता का प्रमाण हैं। अंक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जीवन में चरित्र, अनुशासन और व्यवहार उससे भी अधिक महत्वपूर्ण हैं। यदि आपके अंदर ईमानदारी, मेहनत और दूसरों के प्रति सम्मान है, तो आप जीवन में बहुत आगे जाएँगे।
अनुशासन सफलता की पहली सीढ़ी है। यदि आप प्रतिदिन समय पर उठते हैं, नियमित पढ़ाई करते हैं, अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर रहते हैं, तो धीरे-धीरे आपकी आदतें आपको सफलता की ओर ले जाएँगी। छोटी-छोटी अच्छी आदतें ही बड़े परिणाम देती हैं।
मोबाइल और सोशल मीडिया आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। तकनीक बुरी नहीं है, लेकिन उसका गलत उपयोग हमारे समय और ध्यान को नष्ट कर देता है। सोचिए, यदि आप रोज़ दो घंटे बिना उद्देश्य मोबाइल चलाते हैं, तो एक वर्ष में कितने घंटे व्यर्थ चले जाते हैं! वही समय यदि आप किसी नई चीज़ को सीखने में लगाएँ, तो आप अपने जीवन को पूरी तरह बदल सकते हैं।
विद्यार्थियों, समय सबसे मूल्यवान धन है। खोया हुआ पैसा वापस आ सकता है, लेकिन खोया हुआ समय कभी वापस नहीं आता। इसलिए हर दिन का सही उपयोग कीजिए।
एक छोटा-सा नियम अपनाइए —
“आज का काम आज ही।”
जब आप काम को टालना बंद कर देंगे, तब सफलता आपके और करीब आने लगेगी।
असफलता से डरिए मत। असफलता कोई अंत नहीं है, बल्कि सीखने का अवसर है। यदि आप कभी परीक्षा में कम अंक ले आएँ, तो निराश मत होइए। यह केवल एक परिणाम है, आपकी पूरी पहचान नहीं।
Thomas Edison ने बल्ब बनाने से पहले हजारों बार प्रयास किया। जब उनसे पूछा गया कि वे हजार बार असफल हुए, तो उन्होंने कहा —
“मैं असफल नहीं हुआ, मैंने केवल हजार ऐसे तरीके खोजे जो काम नहीं करते।”
यह सोच ही महान लोगों को महान बनाती है।
जीवन में लक्ष्य होना बहुत आवश्यक है। जिस विद्यार्थी का कोई लक्ष्य नहीं होता, वह बिना दिशा के चलती नाव की तरह होता है। इसलिए अपने जीवन का एक उद्देश्य तय कीजिए। चाहे आप डॉक्टर बनना चाहते हों, शिक्षक, इंजीनियर, वैज्ञानिक, कलाकार या अधिकारी — अपने सपनों को स्पष्ट रखिए और उन्हें पाने के लिए पूरी मेहनत कीजिए।
लेकिन केवल सपने देखने से कुछ नहीं होता। सपनों को सच करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। रातों की नींद छोड़नी पड़ती है। आराम छोड़ना पड़ता है।
जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब सफल लोग अपने सपनों के लिए काम कर रहे होते हैं।
याद रखिए —
“मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे।”
आपके माता-पिता और शिक्षक आपके जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं। माता-पिता आपके लिए दिन-रात मेहनत करते हैं ताकि आपको बेहतर भविष्य मिल सके। उनके त्याग और प्रेम का सम्मान कीजिए। अपने शिक्षकों का आदर कीजिए, क्योंकि वे केवल किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी दिखाते हैं।
सच्ची सफलता वही है जिसमें इंसान अच्छा व्यक्ति भी बने। यदि आप बड़े होकर केवल अमीर बन गए, लेकिन आपके अंदर दया, सम्मान और मानवता नहीं रही, तो वह सफलता अधूरी है। इसलिए हमेशा विनम्र रहिए। दूसरों की सहायता कीजिए। किसी का मज़ाक मत उड़ाइए। दूसरों को गिराकर नहीं, बल्कि साथ लेकर आगे बढ़िए।
स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितनी पढ़ाई। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है। नियमित व्यायाम कीजिए, अच्छा भोजन खाइए और पर्याप्त नींद लीजिए। यदि शरीर और मन स्वस्थ होंगे, तभी आप पूरी ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ पाएँगे।
कभी-कभी जीवन में अकेलापन, तनाव या निराशा महसूस होती है। ऐसे समय में खुद को कमजोर मत समझिए। अपने माता-पिता, मित्रों या शिक्षकों से बात कीजिए। याद रखिए, हर कठिन समय गुजर जाता है। अंधेरी रात के बाद सुबह अवश्य आती है।
अपने अंदर सकारात्मक सोच विकसित कीजिए। हर दिन खुद से कहिए —
“मैं कर सकता हूँ।”
“मैं सफल बनूँगा।”
“मैं हार नहीं मानूँगा।”
यह छोटे-छोटे वाक्य आपके आत्मविश्वास को मजबूत बनाते हैं।
प्रिय विद्यार्थियों,
आप केवल अपने परिवार की आशा नहीं हैं, बल्कि देश का भविष्य भी हैं। आने वाला भारत आपके विचारों, आपके ज्ञान और आपके चरित्र से बनेगा। इसलिए अपने जीवन को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए भी उपयोगी बनाइए।
जब भी थक जाएँ, अपने सपनों को याद कीजिए। जब भी डर लगे, अपनी मेहनत को याद कीजिए। और जब भी हार मानने का मन करे, उन लोगों को याद कीजिए जिन्हें आप पर विश्वास है।
आपके अंदर वह शक्ति है जो पर्वतों को भी झुका सकती है। बस जरूरत है खुद पर विश्वास रखने की।
अंत में मैं आपसे केवल इतना कहना चाहता हूँ —
बड़े सपने देखो।
मेहनत से कभी मत भागो।
समय का सम्मान करो।
असफलता से मत डरो।
अपने माता-पिता और शिक्षकों का आदर करो।
और सबसे महत्वपूर्ण — कभी भी खुद पर विश्वास खो मत देना।
एक दिन ऐसा अवश्य आएगा जब आपकी मेहनत रंग लाएगी, आपके माता-पिता गर्व से मुस्कुराएँगे और दुनिया आपकी सफलता की कहानी सुनेगी।
याद रखिए —
“सफलता की राह आसान नहीं होती, लेकिन जो लोग हिम्मत और मेहनत के साथ चलते हैं, मंज़िल उन्हीं के कदम चूमती है।”
आप सभी उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ें, यही शुभकामनाएँ।
जय हिंद! जय भारत!
धन्यवाद
अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा ।
आपका पथ-प्रदर्शक
धर्मेन्द्र कुमार
Welcome
Welcome to the new Academic Session in the school
- Admissions: Online registration for Class 1 and Balvatika (Nursery/LKG/UKG) remains a top priority, with the first provisional admission lists typically expected in early April.
- Infrastructure: Many campuses are operating as PM SHRI Schools, focusing on "future-ready" education with smart classrooms and modern technology.
- Activities: Students can look forward to a diverse range of activities, including Olympiads, Art & Craft exhibitions, and Fun Days held every Saturday.
prayas - April 2026 Issue - 76
Year - 7 Month - April 2026 Issue - 76
मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,
अपने भविष्य के निर्माता आप स्वयं हैं
हर सुबह जब आप स्कूल की दहलीज पर कदम रखते हैं, तो आप केवल ईंट-पत्थर की एक इमारत में नहीं जा रहे होते। आप अपने 'भविष्य' की प्रयोगशाला में प्रवेश कर रहे होते हैं। वे डेस्क, ब्लैकबोर्ड और गलियारों का शोर—ये सब वो कच्चा माल हैं जिनसे आप उस इंसान का निर्माण करेंगे जो आप कल बनने वाले हैं।
1. "अभी नहीं" की शक्ति
कक्षा 6 और उसके आगे के सफर में, आपको ऐसे विषय मिलेंगे जो किसी ऊँचे पहाड़ की तरह कठिन लगेंगे। चाहे वह गणित का कोई उलझा हुआ सवाल हो या इतिहास की कोई चुनौती, सफलता का रहस्य एक सरल वाक्य में छिपा है: "मुझे यह अभी नहीं पता है—पर मैं सीख जाऊँगा।"
बुद्धि कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो जन्म से स्थिर हो; यह एक मांसपेशी की तरह है। हर बार जब आप किसी कठिन विषय से जूझते हैं और हार मानने से इनकार कर देते हैं, तो वह मांसपेशी और मजबूत हो जाती है। असफलता कोई 'फुल स्टॉप' नहीं है; यह गहराई से समझने का एक नया रास्ता है। छोटी-मोटी गलतियों से घबराएं नहीं, क्योंकि गिरने के बाद ही हम आत्मविश्वास से चलना सीखते हैं।
2. जिज्ञासा को अपनी दिशा बनाएं
अपने आस-पास की दुनिया को उत्सुकता भरी नज़रों से देखें। इतिहास के सबसे सफल लोग—चाहे वे वैज्ञानिक हों या कलाकार—उन सब में एक बात समान थी: अटूट जिज्ञासा।
केवल परीक्षा पास करने के लिए न पढ़ें; यह समझने के लिए पढ़ें कि दुनिया कैसे काम करती है। तब तक "क्यों" पूछें जब तक आप किसी बात की जड़ तक न पहुँच जाएँ। जब आप विषयों को बोझ के बजाय दुनिया के रहस्यों को खोलने वाली 'चाबी' के रूप में देखना शुरू करेंगे, तो स्कूल जाना मजबूरी नहीं, बल्कि एक रोमांचक सफर बन जाएगा।
3. चरित्र की ताकत
माना कि ग्रेड्स और अंक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन आपका चरित्र ही आपकी लंबी सफलता को तय करेगा। ईमानदारी, दयालुता और जुझारूपन (Resilience) को किसी रिपोर्ट कार्ड पर नहीं मापा जा सकता, लेकिन यही गुण आपको एक सच्चा लीडर बनाते हैं।
ईमानदारी: सही काम करना, तब भी जब कोई आपको देख न रहा हो।
दयालुता: वह इंसान बनना जो नए छात्र का स्वागत करे या किसी कमजोर सहपाठी की मदद करे।
जुझारूपन: कम अंक आने पर निराश होकर बैठने के बजाय, फिर से उठना और नई रणनीति के साथ कोशिश करना।
4. आपकी संगति का असर
आपकी कक्षा में बैठने वाले छात्र केवल सहपाठी नहीं हैं; वे आपका सहारा हैं। अपने आप को ऐसे लोगों से घेरें जो आपको बेहतर बनने की चुनौती दें, जो आपकी जीत पर खुश हों और जब आप उदास हों तो आपका हौसला बढ़ाएं। एक प्रेरित क्लास मिलकर वह सब हासिल कर सकती है जो शायद एक अकेला छात्र न कर पाए।
5. भविष्य का क्षितिज
अभी शायद आपको लगे कि आपकी दुनिया स्कूल की दीवारों तक ही सीमित है। लेकिन याद रखें, आज आप जो आदतें बना रहे हैं—समय पर उठना, व्यवस्थित रहना और सीखते रहना—वही आपके भविष्य के करियर और परिवार की नींव रखेंगी।
आपके पास दुनिया बदलने की ताकत है। चाहे आप बीमारियों का इलाज करना चाहते हों, नए शहर बसाना चाहते हों या ऐसी कहानियाँ लिखना चाहते हों जो लोगों के दिल छू लें—इस सब की शुरुआत आज यहीं, कक्षा 7A में, आपके एक फैसले से होती है।
आपका भविष्य का स्वरूप आज ही आपके लिए तालियाँ बजा रहा है। उसे निराश मत होने देना।
जय हिंद! जय भारत!
धन्यवाद
अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा ।
आपका पथ-प्रदर्शक
धर्मेन्द्र कुमार
Prayas - March 2026
Year - 7 Month - March 2026 Issue - 75
मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,
जीवन एक अनमोल अवसर है। प्रत्येक विद्यार्थी अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है। कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर, कोई शिक्षक, कोई वैज्ञानिक, तो कोई कलाकार। परंतु सफलता केवल बड़े सपने देखने से नहीं मिलती, बल्कि सही सोच, सतत प्रयास, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण से मिलती है। सफलता कोई एक दिन में मिलने वाली वस्तु नहीं है, यह निरंतर परिश्रम और धैर्य का परिणाम है।
विद्यालय जीवन सफलता की पहली सीढ़ी है। यहीं से हम अपने भविष्य की नींव रखते हैं। यदि नींव मजबूत होगी, तो इमारत भी मजबूत होगी। इसलिए विद्यार्थियों को अपने जीवन के इस महत्वपूर्ण समय को समझदारी और समर्पण के साथ उपयोग करना चाहिए।
सफलता का वास्तविक अर्थ
अधिकांश लोग सफलता को केवल धन, पद या प्रसिद्धि से जोड़ते हैं, परंतु वास्तविक सफलता उससे कहीं अधिक व्यापक है। सफलता का अर्थ है – अपने लक्ष्य को प्राप्त करना, आत्मसंतोष पाना और समाज के लिए उपयोगी बनना।
यदि कोई विद्यार्थी अपने अध्ययन में मन लगाकर अच्छा प्रदर्शन करता है, अपने माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करता है, और अच्छे संस्कारों को अपनाता है, तो वह भी सफलता की ओर अग्रसर है।
सच्ची सफलता वही है जिसमें नैतिकता, ईमानदारी और मानवता शामिल हो। यदि हम दूसरों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ते हैं, तो वह केवल प्रतियोगिता है; पर यदि हम सबको साथ लेकर आगे बढ़ते हैं, तो वह वास्तविक सफलता है।
बड़ा सपना देखें, स्पष्ट लक्ष्य बनाएं
जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे पहले लक्ष्य का निर्धारण आवश्यक है। जिस विद्यार्थी का कोई लक्ष्य नहीं होता, उसका जीवन बिना दिशा की नाव की तरह होता है।
आपको यह सोचना चाहिए कि आप भविष्य में क्या बनना चाहते हैं। लक्ष्य स्पष्ट और व्यावहारिक होना चाहिए। उदाहरण के लिए – “मैं कक्षा में प्रथम आऊँगा”, “मैं प्रतिदिन दो घंटे पढ़ाई करूँगा”, “मैं एक सफल वैज्ञानिक बनूँगा” आदि।
लक्ष्य बनाने के बाद उसे छोटे-छोटे चरणों में बाँट लें। इससे लक्ष्य कठिन नहीं लगेगा और उसे प्राप्त करना सरल हो जाएगा।
परिश्रम ही सफलता की कुंजी है
कहा गया है – “परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता।” संसार के सभी महान व्यक्तियों ने कठिन परिश्रम करके ही सफलता प्राप्त की है।
Dr. A.P.J. Abdul Kalam ने साधारण परिवार से निकलकर अपने परिश्रम और लगन से भारत के राष्ट्रपति पद तक का सफर तय किया। वे विद्यार्थियों को हमेशा बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए मेहनत करने की प्रेरणा देते थे।
Swami Vivekananda ने कहा था – “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” यह वाक्य हमें निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देता है।
विद्यार्थियों को चाहिए कि वे नियमित रूप से पढ़ाई करें, समय का सदुपयोग करें और आलस्य से दूर रहें। कठिनाइयाँ आएँगी, परंतु निरंतर प्रयास करने से सफलता अवश्य मिलेगी।
समय का महत्व
समय सबसे कीमती धन है। जो विद्यार्थी समय का सही उपयोग करना जानते हैं, वही जीवन में आगे बढ़ते हैं।
समय को व्यर्थ मोबाइल, टीवी या अनावश्यक गतिविधियों में न गँवाएँ। एक समय-सारिणी (टाइम टेबल) बनाएं और उसका पालन करें। पढ़ाई, खेल, विश्राम और परिवार के लिए संतुलित समय निर्धारित करें।
समय प्रबंधन की आदत आपको जीवन भर सफलता दिलाएगी।
अनुशासन और आत्मनियंत्रण
अनुशासन सफलता की रीढ़ है। बिना अनुशासन के कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक सफल नहीं रह सकता।
विद्यालय के नियमों का पालन करना, समय पर कार्य पूरा करना, नियमित उपस्थिति बनाए रखना और शिक्षकों का सम्मान करना – ये सभी अनुशासन के अंग हैं।
आत्मनियंत्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि हम अपनी इच्छाओं और भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रखेंगे, तो लक्ष्य से भटक सकते हैं। इसलिए संयम और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास
सकारात्मक सोच हमें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति देती है। यदि परीक्षा में अपेक्षित अंक न मिलें, तो निराश होने के बजाय यह सोचें कि अगली बार बेहतर प्रयास करेंगे।
आत्मविश्वास सफलता का आधार है। यदि आपको स्वयं पर विश्वास है, तो दुनिया की कोई शक्ति आपको रोक नहीं सकती।
“मैं कर सकता हूँ” – यह विश्वास ही सफलता की शुरुआत है।
असफलता से सीखें
असफलता जीवन का अंत नहीं है, बल्कि नई शुरुआत है। जो विद्यार्थी असफलता से डरते हैं, वे कभी बड़े लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाते।
जब भी असफलता मिले, तो यह सोचें कि गलती कहाँ हुई और उसे कैसे सुधारा जा सकता है। असफलता हमें अनुभव देती है और अनुभव हमें परिपक्व बनाता है।
महान वैज्ञानिकों और नेताओं ने भी अनेक बार असफलता का सामना किया, परंतु उन्होंने हार नहीं मानी।
अच्छे संस्कार और नैतिक मूल्य
सफलता केवल अंक और पद से नहीं मापी जाती, बल्कि व्यक्ति के चरित्र से मापी जाती है।
सत्य बोलना, ईमानदार रहना, बड़ों का सम्मान करना, जरूरतमंदों की सहायता करना – ये सभी अच्छे संस्कार हैं।
यदि हम नैतिक मूल्यों को अपनाते हैं, तो समाज में सम्मान प्राप्त करते हैं। चरित्रवान व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में सफल होता है।
स्वास्थ्य का ध्यान रखें
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। यदि शरीर स्वस्थ नहीं होगा, तो पढ़ाई में मन नहीं लगेगा।
प्रतिदिन व्यायाम करें, संतुलित आहार लें और पर्याप्त नींद लें। खेलकूद में भाग लेने से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा का संतुलन ही सम्पूर्ण विकास का आधार है।
अच्छे मित्र और प्रेरणादायक वातावरण
मित्र हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। अच्छे मित्र हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं, जबकि बुरी संगति हमें गलत दिशा में ले जा सकती है।
इसलिए ऐसे मित्र चुनें जो पढ़ाई में रुचि रखते हों, सकारात्मक सोच रखते हों और अच्छे संस्कारों वाले हों।
घर और विद्यालय का सकारात्मक वातावरण भी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
तकनीक का सही उपयोग
आज का युग तकनीक का युग है। मोबाइल, इंटरनेट और कंप्यूटर ज्ञान प्राप्त करने के अच्छे साधन हैं।
परंतु उनका उपयोग सीमित और सही उद्देश्य के लिए होना चाहिए। ऑनलाइन अध्ययन, शैक्षिक वीडियो और डिजिटल पुस्तकें आपके ज्ञान को बढ़ा सकती हैं।
तकनीक का दुरुपयोग समय और ऊर्जा दोनों को नष्ट कर सकता है।
जीवन में सफलता कोई संयोग नहीं, बल्कि सही सोच, स्पष्ट लक्ष्य, कठोर परिश्रम, अनुशासन, सकारात्मक दृष्टिकोण और नैतिक मूल्यों का परिणाम है।
विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने जीवन का उद्देश्य निर्धारित करें, निरंतर प्रयास करें और असफलता से न घबराएँ।
याद रखें –
“सपने वह नहीं जो हम सोते समय देखते हैं,
सपने वह हैं जो हमें सोने नहीं देते।”
यदि आप आज से ही मेहनत, ईमानदारी और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे, तो सफलता निश्चित रूप से आपके कदम चूमेगी।
जीवन एक यात्रा है। इस यात्रा को सकारात्मक सोच, परिश्रम और सदाचार से सजाएँ। तभी आप न केवल अपने लिए, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणा बनेंगे।
सफलता आपके हाथों में है – बस उसे पाने का साहस और संकल्प चाहिए। 🌟
जय हिंद! जय भारत!
धन्यवाद
अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा ।
आपका पथ-प्रदर्शक
धर्मेन्द्र कुमार
Prayas - February 2026
Year - 7 Month - February 2026 Issue - 74
मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,
आप सभी के ऊर्जावान चेहरों को देखकर मुझे न केवल गर्व हो रहा है, बल्कि भारत के एक उज्ज्वल भविष्य की झलक भी मिल रही है। स्कूल का यह दौर आपके जीवन का वह पड़ाव है जहाँ आप केवल विषय नहीं पढ़ते, बल्कि अपने चरित्र का निर्माण करते हैं।
1. सपनों की अहमियत: उड़ान की शुरुआत
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था, "सपने वो नहीं होते जो आप नींद में देखते हैं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते।" मेरे दोस्तों, स्कूल की इन दीवारों के बीच बैठकर कभी यह मत सोचना कि आप छोटे हैं या आपके सपने बहुत बड़े हैं। इतिहास गवाह है कि दुनिया के हर बड़े बदलाव की शुरुआत एक छोटे से कमरे में देखे गए एक बड़े सपने से हुई थी। आपके सपने आपकी पहचान हैं। अगर आप डॉक्टर, इंजीनियर, कलाकार, खिलाड़ी या एक उद्यमी बनना चाहते हैं, तो आज से ही उस सपने को जीना शुरू करें।
2. विफलता: सफलता की पहली सीढ़ी
अक्सर हम परीक्षा के अंकों (Marks) को अपनी काबिलियत का पैमाना मान लेते हैं। लेकिन याद रखना, एक कागज का टुकड़ा आपका भविष्य तय नहीं कर सकता। विफलता से डरो मत। विफलता का मतलब हारना नहीं होता, बल्कि इसका मतलब है कि आपको एक और मौका मिला है—बेहतर तरीके से शुरुआत करने का। थॉमस एडिसन जब बल्ब बना रहे थे, तो वे हजारों बार फेल हुए। उन्होंने क्या कहा? उन्होंने कहा, "मैं फेल नहीं हुआ, मैंने बस 10,000 ऐसे तरीके खोज लिए हैं जो काम नहीं करते।"
सीख: अगर आप गिरते हैं, तो यह मायने नहीं रखता। मायने यह रखता है कि क्या आप दोबारा उठने का साहस रखते हैं?
3. अनुशासन और कड़ी मेहनत का जादू
प्रतिभा (Talent) आपको भगवान से मिलती है, लेकिन कौशल (Skill) केवल घंटों की कड़ी मेहनत और अनुशासन से आता है।
अनुशासन का मतलब खुद को कष्ट देना नहीं है, बल्कि इसका मतलब है—उस चीज़ को चुनना जिसे आप सबसे ज्यादा चाहते हैं, उस चीज़ के ऊपर जिसे आप अभी चाहते हैं। * शायद आप अभी सोना चाहते हैं, लेकिन आपका सपना पढ़ना है।
शायद आप अभी सोशल मीडिया चलाना चाहते हैं, लेकिन आपकी मंजिल अभ्यास करना है।
यही छोटे-छोटे चुनाव आपको भीड़ से अलग खड़ा करेंगे। याद रखें, "पसीने की स्याही से जो लिखते हैं अपने इरादों को, उनके मुकद्दर के पन्ने कभी कोरे नहीं हुआ करते।"
4. सोशल मीडिया और ध्यान (Focus) की चुनौती
आज के दौर में आपके पास ज्ञान का सागर (Internet) तो है, लेकिन साथ ही भटकाव (Distraction) के हजारों रास्ते भी हैं। रील और शॉर्ट्स की दुनिया में अपना कीमती समय बर्बाद न करें। यह समय आपके "Skill Set" को बनाने का है, न कि दूसरों की जिंदगी को स्क्रीन पर देखने का।
अपने ध्यान को एक लेजर की तरह तेज करें। जब आप पढ़ें, तो केवल पढ़ें। जब आप खेलें, तो केवल खेलें।
5. चरित्र और संस्कार: एक अच्छे इंसान बनें
शिक्षा का असली उद्देश्य केवल एक अच्छी नौकरी पाना नहीं है। शिक्षा का असली उद्देश्य आपको एक 'बेहतर इंसान' बनाना है।
अपने शिक्षकों का सम्मान करें, क्योंकि वे आपके जीवन के शिल्पकार हैं।
अपने माता-पिता के त्याग को समझें। उनकी आंखों में अपने लिए एक चमक देखें, बोझ नहीं।
अपने सहपाठियों की मदद करें। प्रतिस्पर्धा (Competition) खुद से रखें, दूसरों से ईर्ष्या (Jealousy) नहीं।
6. समय की कीमत
समय वह धन है जिसे आप कभी दोबारा नहीं कमा सकते। जो बीत गया वो कल था, जो आएगा वो भविष्य है, लेकिन जो आपके हाथ में है, वो 'आज' है।
हर सुबह जब आप उठें, तो खुद से पूछें—"आज मैं ऐसा क्या करूँगा जो मुझे मेरे सपने के एक कदम और करीब ले जाए?"
7. परीक्षा: एक उत्सव, न कि डर
जैसे ही परीक्षा की तारीखें नज़दीक आती हैं, घर का माहौल किसी युद्ध जैसा हो जाता है। "कितना पढ़ा?", "सिलेबस पूरा हुआ या नहीं?"—ये सवाल आपको डराने लगते हैं। लेकिन याद रखिए, परीक्षा आपकी याददाश्त का टेस्ट हो सकती है, आपके व्यक्तित्व का नहीं।
तनाव क्यों होता है? तनाव तब होता है जब हम परिणाम (Result) के बारे में सोचते हैं। हम डरते हैं कि अगर कम नंबर आए तो लोग क्या कहेंगे।
समाधान: आप केवल अपनी तैयारी पर ध्यान दें। यदि आपने अपना शत-प्रतिशत (100%) दिया है, तो परिणाम जो भी हो, आपको पछतावा नहीं होगा। परीक्षा को एक 'बौद्धिक चुनौती' की तरह लें, न कि जीवन-मरण का प्रश्न।
याद रखें: एक फेलियर आपको यह नहीं बताता कि आप कमज़ोर हैं, वह बस यह बताता है कि आपकी रणनीति में सुधार की ज़रूरत है।
8. करियर का चुनाव: भीड़ का हिस्सा न बनें
स्कूल खत्म होने के बाद सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—"अब आगे क्या?"। अक्सर छात्र वही रास्ता चुनते हैं जिस पर उनके दोस्त जा रहे हैं या जिस पर समाज का दबाव है।
करियर चुनते समय इन तीन बातों (IKIGAI का एक सरल रूप) पर गौर करें:
आपकी रुचि (Passion): वह क्या है जिसे करते समय आप समय भूल जाते हैं?
आपकी क्षमता (Skill): आप किस काम में स्वाभाविक रूप से अच्छे हैं?
भविष्य की जरूरत: क्या उस क्षेत्र में आगे बढ़ने की संभावनाएं हैं?
अगर आप एक बेहतरीन चित्रकार बन सकते हैं, तो एक औसत इंजीनियर बनकर आप कभी खुश नहीं रह पाएंगे। दुनिया को केवल डॉक्टरों और इंजीनियरों की ही नहीं, बल्कि लेखकों, विचारकों, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों और अच्छे राजनेताओं की भी ज़रूरत है। अपनी 'यूनिकनेस' (Uniqueness) को पहचानें।
9. मानसिक स्वास्थ्य: शांत मन की शक्ति
छात्र जीवन में अक्सर हम 'मानसिक सेहत' को भूल जाते हैं। तनाव और चिंता में डूबा हुआ दिमाग कभी भी अच्छी तरह से सीख नहीं सकता।
ब्रेक लें: लगातार घंटों पढ़ने के बजाय छोटे-छोटे ब्रेक लें।
नींद से समझौता न करें: एक थका हुआ दिमाग जानकारी को संचित (Store) नहीं कर सकता। 7-8 घंटे की नींद आपकी एकाग्रता को बढ़ाती है।
बात करें: अगर आप परेशान हैं, तो अपने शिक्षकों या माता-पिता से बात करें। अपनी चिंताओं को अंदर दबाकर न रखें।
10. हार को स्वीकार करना सीखें
आज की दुनिया बहुत प्रतिस्पर्धी (Competitive) है। हर कोई 'नंबर 1' आना चाहता है। लेकिन असल सफलता इस बात में नहीं है कि आप कभी न गिरें, बल्कि इसमें है कि गिरने के बाद आप कितनी जल्दी खड़े होते हैं। क्रिकेट के मैदान पर भी हर गेंद पर छक्का नहीं लगता, लेकिन एक अच्छा खिलाड़ी वही है जो अगली गेंद का इंतज़ार पूरे आत्मविश्वास के साथ करता है। जीवन भी वैसा ही है। एक परीक्षा खराब हुई? कोई बात नहीं। एक एंट्रेंस एग्जाम नहीं निकला? रास्ता बदलो, मंज़िल नहीं।
मेरे युवा साथियों, आप इस देश की रीढ़ की हड्डी हैं। आपके भीतर असीम ऊर्जा भरी हुई है। दुनिया आपको बताएगी कि आप यह नहीं कर सकते, परिस्थितियां आपको रोकेंगी, लेकिन आपको रुकना नहीं है।
याद रखना: "मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।"
उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। पूरा स्कूल, आपके माता-पिता और यह देश आपकी सफलता का इंतज़ार कर रहा है। जाओ और अपनी कहानी खुद लिखो!
जय हिंद! जय भारत!
धन्यवाद
अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा ।
आपका पथ-प्रदर्शक
धर्मेन्द्र कुमार
