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Student Support Material

Prayas - October 2026

 

Year - 7                                  Month - October 2026                            Issue - 81

मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,

आज मैं आपके सामने कोई भारी-भरकम उपदेश देने नहीं आया हूँ। मैं आपसे एक दोस्त की तरह बात करना चाहता हूँ, क्योंकि जो बातें मैं कहने जा रहा हूँ, वे हर उस इंसान के दिल की बातें हैं जिसने कभी कोई सपना देखा है।

एक छोटा-सा सवाल

मैं आपसे एक सवाल पूछता हूँ। क्या आपने कभी रात को सोने से पहले छत की ओर देखकर सोचा है कि "मैं बड़ा होकर क्या बनूँगा?" क्या कभी आपके मन में यह ख्याल आया कि "काश, मैं भी कुछ ऐसा कर पाता जिस पर मेरे माता-पिता को गर्व हो?"

अगर हाँ, तो बधाई हो! आप जीवित हैं, आपके भीतर आग है, और आप में कुछ कर गुज़रने की ताकत है। सपने देखना ही सफलता की पहली सीढ़ी है।

पर याद रखिए, केवल सपने देखना काफी नहीं है। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था कि सपने वो नहीं जो आप नींद में देखते हैं, सपने वो हैं जो आपको सोने नहीं देते। और यही बात आज मैं आपके दिल में उतारना चाहता हूँ।

शुरुआत हमेशा छोटी होती है

दोस्तो, हर बड़ी इमारत की नींव में एक छोटी-सी ईंट होती है। हर बड़ी नदी किसी पहाड़ की एक छोटी-सी बूँद से शुरू होती है। हर महान व्यक्ति कभी एक साधारण विद्यार्थी था।

अब्दुल कलाम का बचपन रामेश्वरम की गलियों में अख़बार बाँटते हुए बीता। वे एक ऐसे परिवार से थे जहाँ पैसों की तंगी थी। लेकिन उनके पास एक चीज़ थी, जिज्ञासा और सीखने की भूख। वही लड़का आगे चलकर भारत का "मिसाइल मैन" बना और देश का राष्ट्रपति बना।

हमारे आसपास ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं। कोई गाँव के सरकारी स्कूल से पढ़कर आई.ए.एस. अफसर बना, किसी ने लालटेन की रोशनी में पढ़कर डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया, किसी ने साधारण परिवार से निकलकर खेल के मैदान पर तिरंगा लहराया।

तो आप यह कभी मत सोचिए कि "मेरे पास तो साधन नहीं हैं", "मैं तो छोटे शहर से हूँ", या "मेरे पास तो अच्छे स्कूल की सुविधा नहीं है।" साधन आपको रास्ता दिखा सकते हैं, पर मंज़िल तक पैर आपके अपने ही चलते हैं।

असफलता अंत नहीं है

अब मैं एक ऐसी बात करना चाहता हूँ जिससे हम में से बहुत से लोग डरते हैं, और वह है असफलता।

परीक्षा में कम नंबर आ गए, तो लगता है जैसे दुनिया खत्म हो गई। किसी प्रतियोगिता में हार गए, तो लगता है अब कुछ नहीं हो सकता। दोस्तो, यह सोच बिल्कुल गलत है।

थॉमस एडिसन ने बल्ब बनाने की कोशिश में हज़ारों बार असफलता पाई। जब किसी ने उनसे पूछा कि आप इतनी बार असफल हुए, तो निराश क्यों नहीं हुए? उन्होंने मुस्कुराकर कहा, "मैं असफल नहीं हुआ, मैंने तो बस हज़ारों ऐसे तरीके खोज लिए जो काम नहीं करते।"

सोचिए, अगर एडिसन पहली या दसवीं असफलता पर हार मान लेते, तो आज हमारी रातें अँधेरे में होतीं।

असफलता हमारी दुश्मन नहीं, हमारी सबसे बड़ी शिक्षक है। वह हमें बताती है कि कहाँ कमी रह गई, किस जगह और कितनी मेहनत की ज़रूरत है। जो गिरकर उठना सीख लेता है, वही असली विजेता बनता है।

एक बच्चा जब चलना सीखता है, तो कितनी बार गिरता है? लेकिन क्या वह कभी कहता है कि "मुझसे नहीं होगा"? नहीं! वह उठता है, फिर गिरता है, फिर उठता है, और एक दिन दौड़ने लगता है। हम सब के भीतर वही बच्चा आज भी जीवित है। बस हमें उसे फिर से जगाना है।

मेहनत का कोई विकल्प नहीं

मेरे प्यारे विद्यार्थियो, इस दुनिया में कोई जादू की छड़ी नहीं होती जो आपको रातोंरात सफल बना दे। अगर कोई ऐसा दावा करे, तो समझ जाइए कि वह झूठ बोल रहा है।

सफलता का एक ही रास्ता है, और वह है लगातार मेहनत। एक किसान को देखिए। वह बीज बोता है, फिर महीनों तक खेत में पसीना बहाता है, पानी देता है, रखवाली करता है। तब जाकर फसल लहलहाती है। अगर वह आज बीज बोकर कल ही फसल माँगे, तो क्या मिलेगा?

पढ़ाई भी ठीक ऐसी ही है। आज आप जो पाठ पढ़ रहे हैं, जो सवाल हल कर रहे हैं, वे सब बीज हैं। उनका फल शायद आज न दिखे, पर एक दिन ज़रूर दिखेगा।

और मेहनत का मतलब केवल घंटों किताबों में डूबे रहना नहीं है। मेहनत का मतलब है स्मार्ट तरीके से, नियमित रूप से और पूरी लगन के साथ काम करना। रोज़ थोड़ा-थोड़ा पढ़ना, रोज़ थोड़ा-थोड़ा सुधरना। यही छोटी-छोटी आदतें आगे चलकर बड़ी सफलता बनती हैं।

याद रखिए, कल की चिंता में आज को मत खोइए। जो काम आज करना है, आज ही कीजिए। "कल से पक्का शुरू करूँगा" वाला वह कल कभी नहीं आता।

समय की कीमत पहचानिए

समय दुनिया की सबसे कीमती चीज़ है, और सबसे अजीब बात यह है कि यह सबको बराबर मिलता है। चाहे अंबानी हो या आम इंसान, दिन में सबको चौबीस घंटे ही मिलते हैं। फर्क इस बात का है कि कौन उन्हें कैसे इस्तेमाल करता है।

आज के दौर में हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है मोबाइल और सोशल मीडिया। मैं यह नहीं कहता कि तकनीक बुरी है। तकनीक एक अद्भुत वरदान है। इसी से हम दुनिया भर का ज्ञान अपनी उँगलियों पर पा सकते हैं। पर जब यह हमारा समय निगलने लगे, जब घंटों बेमतलब की रील्स देखते हुए बीत जाएँ, तब यह वरदान नहीं, एक जाल बन जाता है।

अपने आप से पूछिए: "आज मैंने ऐसा क्या किया जो मुझे कल से बेहतर बनाता है?" अगर इसका जवाब रोज़ "हाँ" है, तो आप सही रास्ते पर हैं।

सही संगति, सही सोच

कहा जाता है कि इंसान अपनी संगति से पहचाना जाता है। आप जिन लोगों के साथ समय बिताते हैं, वे धीरे-धीरे आपकी सोच, आपकी आदतों और आपके भविष्य को गढ़ते हैं।

ऐसे दोस्त बनाइए जो आपको ऊपर उठाएँ, जो आपकी सफलता पर खुश हों और आपकी गलती पर आपको सही राह दिखाएँ। और खुद भी किसी के लिए ऐसा ही दोस्त बनिए।

साथ ही, अपनी सोच को सकारात्मक रखिए। आपका मन एक बगीचे जैसा है। अगर आप उसमें नकारात्मक विचारों के काँटे बोएँगे, तो वही उगेंगे। और अगर आत्मविश्वास, उम्मीद और हिम्मत के फूल बोएँगे, तो जीवन महक उठेगा।

अपने आप से कभी यह मत कहिए कि "मैं नहीं कर सकता।" इसकी जगह कहिए, "मैं कोशिश करूँगा, और मैं सीखूँगा।" शब्दों में बड़ी ताकत होती है, और सबसे ज़्यादा ताकत उन शब्दों में होती है जो हम खुद से कहते हैं।

तुलना मत कीजिए, खुद से मुकाबला कीजिए

आज के विद्यार्थियों की एक बड़ी परेशानी है दूसरों से तुलना करना। "उसके नंबर मुझसे ज़्यादा क्यों आए?" "वह मुझसे आगे क्यों निकल गया?"

बच्चों, हर फूल का अपना रंग होता है, अपनी खुशबू होती है। गुलाब कमल से तुलना नहीं करता, और कमल गुलाब से जलता नहीं। दोनों अपनी-अपनी जगह सुंदर हैं।

आपकी यात्रा आपकी अपनी है। किसी की रफ़्तार तेज़ हो सकती है, किसी की धीमी, पर हर किसी की मंज़िल और समय अलग है। इसलिए दूसरों को देखकर खुद को कम मत आँकिए।

अगर तुलना करनी ही है, तो खुद से कीजिए। कल आप जैसे थे, आज उससे थोड़ा बेहतर बनिए। बस इतना काफी है। यही असली प्रगति है।

अपनों का साथ और अपने मन की सुनिए

मेरे प्यारे बच्चों, कभी-कभी रास्ता कठिन लगेगा। परीक्षा का दबाव होगा, भविष्य की चिंता होगी, और ऐसे पल भी आएँगे जब मन थककर बैठ जाना चाहेगा। यह बिल्कुल स्वाभाविक है। यह कमज़ोरी नहीं, इंसान होने की निशानी है।

ऐसे समय में अकेले मत जूझिए। अपने माता-पिता से बात कीजिए, अपने शिक्षकों से मिलिए, अपने भरोसेमंद दोस्तों को अपने मन की बात बताइए। मदद माँगना हार नहीं है, यह समझदारी है। याद रखिए, आपके माता-पिता ने आपके लिए अपने कितने सपने कुर्बान किए हैं। उनके लिए आपकी खुशी और आपका स्वस्थ रहना किसी भी नंबर या रैंक से कहीं ज़्यादा कीमती है।

अपने शरीर और मन का भी ख्याल रखिए। समय पर सोइए, पौष्टिक खाना खाइए, थोड़ा खेलिए, थोड़ा टहलिए, और जो पसंद है वह शौक भी निभाइए। एक स्वस्थ शरीर और शांत मन ही अच्छी पढ़ाई की नींव है।

ज़िम्मेदारी और संस्कार

सफलता का मतलब केवल ऊँची नौकरी या बड़ा नाम नहीं है। असली सफलता तब है जब आप एक अच्छे इंसान भी बनें।

अपने बड़ों का सम्मान कीजिए, अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञ रहिए, और कमज़ोरों की मदद कीजिए। ईमानदारी, सच्चाई और दया कभी मत छोड़िए। डिग्रियाँ हमें रोज़गार दे सकती हैं, पर संस्कार हमें इंसान बनाते हैं।

हमारा देश भारत युवाओं का देश है। आप ही इसका कल हैं। कल कोई डॉक्टर बनकर लोगों की जान बचाएगा, कोई इंजीनियर बनकर पुल और शहर बनाएगा, कोई शिक्षक बनकर नई पीढ़ी गढ़ेगा, कोई किसान बनकर देश का पेट भरेगा, कोई वैज्ञानिक बनकर चाँद-सितारों तक पहुँचेगा। हर भूमिका महत्वपूर्ण है, और हर भूमिका में आपकी ईमानदार मेहनत देश को आगे ले जाएगी।

अंत में, एक वादा

प्रिय विद्यार्थियो, अब मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ, पर उससे पहले आपसे एक वादा चाहता हूँ। आज अपने आप से एक वादा कीजिए।

वादा कीजिए कि आप हार नहीं मानेंगे।
वादा कीजिए कि आप रोज़ थोड़ा बेहतर बनने की कोशिश करेंगे।
वादा कीजिए कि आप अपने सपनों पर विश्वास रखेंगे, चाहे दुनिया कुछ भी कहे।
और वादा कीजिए कि आप अपने माता-पिता, अपने गुरुओं और अपने देश का नाम रोशन करेंगे।

स्वामी विवेकानंद ने कहा था: "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।"

यह वाक्य सौ साल से भी ज़्यादा पुराना है, पर आज भी उतना ही ताज़ा है, क्योंकि यह हर उस इंसान के लिए है जो कुछ बनना चाहता है।

आपके पास पंख हैं, बस आसमान को देखने की हिम्मत चाहिए। आपके पास पैर हैं, बस पहला कदम उठाने का साहस चाहिए। और आपके पास दिल है, जिसमें अनंत संभावनाएँ भरी हैं।

तो आज से, अभी से, इसी पल से शुरुआत कीजिए। क्योंकि जो आज बोया जाएगा, वही कल लहलहाएगा।

मेरी ओर से आप सभी को ढेरों शुभकामनाएँ। आप जहाँ भी जाएँ, जो भी करें, पूरे दिल से करें और पूरी ईमानदारी से करें। सफलता खुद आपके कदम चूमेगी।

आप सभी उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ें, यही शुभकामनाएँ।

 जय हिंद! जय भारत!

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार 

Shri Krishna Janmashtami 2026

Shri Krishna Janmashtami Celebration Overview by dharmendra kumar

Prayas-September 2026

 

Year - 7                                  Month - September 2026                            Issue - 80

मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,

एक पुस्तकालयाध्यक्ष (Librarian) के रूप में, जब भी मैं विद्यालय के पुस्तकालय में विद्यार्थियों को किताबों की अलमारियों के बीच किसी नई दुनिया की खोज करते हुए देखता हूँ, तो यह मेरे लिए सबसे सुखद अनुभवों में से एक होता है। आज के इस डिजिटल युग में, जहाँ हर जानकारी मात्र एक क्लिक की दूरी पर है और सोशल मीडिया का शोर हमारे ध्यान को लगातार बाँट रहा है, एक शांत कोने में बैठकर किताब पढ़ने का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।

किताबें केवल परीक्षा पास करने का साधन नहीं हैं; वे आपके व्यक्तित्व को आकार देने, आपकी कल्पना को पंख देने और आपको एक बेहतर इंसान बनाने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। आइए समझते हैं कि विद्यार्थियों के जीवन में पुस्तकों की क्या भूमिका है और हम कैसे अपने भीतर पढ़ने की एक स्थायी आदत विकसित कर सकते हैं।

किताबें हमारी सच्ची मित्र क्यों हैं?

महान दार्शनिकों ने हमेशा कहा है कि एक अच्छी किताब सौ अच्छे दोस्तों के बराबर होती है। किताबें आपसे कभी कुछ मांगती नहीं हैं, बल्कि वे आपको अपना पूरा ज्ञान, अनुभव और विचार बिना किसी शर्त के सौंप देती हैं। जब आप निराश होते हैं, तो वे आपको प्रेरणा देती हैं; जब आप अकेले होते हैं, तो वे आपका साथ निभाती हैं।

एक विद्यार्थी के रूप में, आपके जीवन में कई तरह के तनाव होते हैं—परीक्षा का दबाव, भविष्य की चिंता, और साथियों के साथ प्रतिस्पर्धा। एक अच्छी किताब आपको इन तनावों से दूर ले जाकर एक नई दुनिया में प्रवेश कराती है, जहाँ आप शांति का अनुभव कर सकते हैं।

पढ़ने के मानसिक और बौद्धिक लाभ

पुस्तकालय में बिताया गया समय आपके मस्तिष्क के लिए एक बेहतरीन व्यायाम है। नियमित रूप से किताबें पढ़ने से विद्यार्थियों को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलते हैं:

  • एकाग्रता (Focus) में वृद्धि: रील्स और शॉर्ट वीडियो के इस दौर में हमारी एकाग्रता की क्षमता कम होती जा रही है। किताब पढ़ने के लिए एक समय में एक ही विषय पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है, जो धीरे-धीरे आपकी एकाग्रता को कई गुना बढ़ा देता है।

  • शब्दकोश और भाषा शैली में सुधार: जब आप अलग-अलग लेखकों को पढ़ते हैं, तो आप अनजाने में ही नए शब्द, मुहावरे और वाक्य विन्यास सीखते हैं। इससे न केवल आपकी भाषा सुधरती है, बल्कि आप निबंध और कहानियाँ (जैसे हिंदी या अंग्रेजी में रचनात्मक लेखन) बहुत बेहतर तरीके से लिख पाते हैं।

  • तार्किक क्षमता (Critical Thinking): किताबें आपको अलग-अलग दृष्टिकोणों से सोचने पर मजबूर करती हैं। जब आप किसी रहस्यमयी कहानी या वैज्ञानिक तथ्य को पढ़ते हैं, तो आपका दिमाग तार्किक रूप से काम करने लगता है।

  • तनाव में कमी: विज्ञान भी यह मानता है कि सोने से पहले मात्र 15 मिनट किताब पढ़ने से मस्तिष्क को शांति मिलती है और नींद अच्छी आती है।

पाठ्यक्रम से बाहर की किताबें: सफलता की सीढ़ी

कई विद्यार्थियों को लगता है कि सिर्फ स्कूल की किताबें (Syllabus) पढ़ना ही काफी है। लेकिन असली ज्ञान उन किताबों में छिपा है जो आपके पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं। जीवनी (Biographies), आत्मकथाएँ, विज्ञान-कथाएँ और ऐतिहासिक किताबें आपके दृष्टिकोण को व्यापक बनाती हैं।

यदि आप खेलों में रुचि रखते हैं, तो पी. वी. सिंधु (P.V. Sindhu), सेरेना विलियम्स (Serena Williams) या पी. टी. उषा (P.T. Usha) जैसी महान एथलीटों की जीवनियाँ पढ़ें। इनकी कहानियाँ आपको बताएंगी कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और हार न मानने के जज्बे से कैसे दुनिया जीती जाती है। इन खिलाड़ियों ने अपने जीवन में जो संघर्ष किए हैं, वे आपको अपनी छोटी-छोटी परेशानियों से लड़ने की हिम्मत देंगे।

विद्यार्थियों के लिए उपयोगी पुस्तकों की श्रेणियाँ:

पुस्तक की श्रेणी (Genre)

मुख्य लाभ

उदाहरण / विषय

प्रेरक जीवनियाँ (Biographies)

संघर्ष और सफलता की वास्तविक कहानियों से प्रेरणा मिलती है।

महान वैज्ञानिक, एथलीट, स्वतंत्रता सेनानी।

विज्ञान और तकनीक (Science/Tech)

नई खोजों और ब्रह्मांड के रहस्यों के बारे में जिज्ञासा बढ़ती है।

अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स।

साहित्य और उपन्यास (Literature/Fiction)

कल्पना शक्ति (Imagination) और रचनात्मकता का विकास होता है।

मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ, रस्किन बॉन्ड, पंचतंत्र।

इतिहास (History)

अतीत की गलतियों से सीखने और मानव सभ्यता के विकास को समझने का अवसर।

प्राचीन सभ्यताएँ, विश्व युद्ध, भारतीय इतिहास।

पढ़ने की आदत कैसे विकसित करें?

अगर आपको लगता है कि आप किताबें नहीं पढ़ पाते या आपको जल्दी बोरियत होने लगती है, तो चिंता न करें। पढ़ने की आदत रातों-रात नहीं बनती। इसे विकसित करने के लिए कुछ आसान और कारगर तरीके अपनाए जा सकते हैं:

  • अपनी रुचि पहचानें: शुरुआत हमेशा उस विषय से करें जो आपको सबसे ज्यादा पसंद हो। अगर आपको डरावनी कहानियाँ (Horror Stories) पसंद हैं, तो वहीं से शुरू करें। अगर आपको विज्ञान के प्रयोग या गणित की ट्रिक्स (Maths tricks) पसंद हैं, तो वैसी किताबें चुनें।

  • छोटे लक्ष्य निर्धारित करें: पहले दिन ही 100 पन्ने पढ़ने का लक्ष्य न रखें। प्रतिदिन केवल 10-15 पृष्ठ पढ़ने का नियम बनाएं। आप देखेंगे कि एक महीने में ही आपने एक या दो पूरी किताबें खत्म कर ली हैं।

  • सोने से पहले का नियम: रात को सोने से आधा घंटा पहले मोबाइल फोन या टीवी बंद कर दें और उसकी जगह एक अच्छी किताब हाथ में लें। यह आदत न केवल आपके ज्ञान को बढ़ाएगी बल्कि आपकी नींद की गुणवत्ता में भी सुधार करेगी।

  • अपने पुस्तकालय से जुड़ें: विद्यालय का पुस्तकालय ज्ञान का खजाना है। सप्ताह में कम से कम दो बार वहाँ जाएँ। अपने लाइब्रेरियन से नई और रोचक किताबों के बारे में सुझाव लें। वे आपकी रुचि के अनुसार सबसे बेहतरीन किताबें ढूँढने में आपकी मदद करेंगे।

  • किताबों पर चर्चा करें: आपने जो भी नया पढ़ा है, उसके बारे में अपने दोस्तों, शिक्षकों या माता-पिता से चर्चा करें। इससे आपको उस किताब की बातों को लंबे समय तक याद रखने में मदद मिलेगी।

किताबें वे शांत शिक्षक हैं जो बिना डांटे, बिना थके आपको जीवन के सबसे बड़े पाठ पढ़ाते हैं। अलमारियों में सजी ये किताबें सिर्फ कागज के पन्ने नहीं हैं; ये लेखकों के जीवन भर के अनुभव हैं जो वे आपके साथ बांटना चाहते हैं। इसलिए, आज ही अपने स्कूल के पुस्तकालय में जाएँ, अपनी पसंद की कोई एक किताब चुनें और पढ़ने के इस खूबसूरत सफर की शुरुआत करें।

कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास और प्रेरणा के लिए यह 7 बेहतरीन पुस्तकों की सूची आदर्श है।

  • 'अग्नि की उड़ान' (Wings of Fire) – डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम: यह आत्मकथा छात्रों को बड़े सपने देखने, विज्ञान के प्रति जिज्ञासा जगाने और कड़ी मेहनत से लक्ष्य हासिल करने की जबरदस्त प्रेरणा देती है।

  • 'स्वामी और उसके दोस्त' (Swami and Friends) – आर. के. नारायण: मालगुडी की पृष्ठभूमि पर आधारित यह पुस्तक स्कूल जाने वाले बच्चों की मासूमियत, शरारतों और उनकी सच्ची दोस्ती को बेहद रोचक तरीके से दर्शाती है।

  • 'प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ' – मुंशी प्रेमचंद: 'ईदगाह' और 'दो बैलों की कथा' जैसी कहानियाँ विद्यार्थियों में मानवीय संवेदनाओं, नैतिकता और जीवन के वास्तविक मूल्यों की समझ विकसित करती हैं।

  • 'रस्किन बॉन्ड की लोकप्रिय कहानियाँ' – रस्किन बॉन्ड: 'द ब्लू अम्ब्रेला' (The Blue Umbrella) जैसी कहानियाँ बच्चों को पहाड़ों और प्रकृति से गहराई से जोड़ती हैं और उनकी कल्पनाशीलता को उड़ान देती हैं।

  • 'पंचतंत्र' – पंडित विष्णु शर्मा: जानवरों के पात्रों वाली इन प्राचीन कहानियों के माध्यम से छात्र जीवन की व्यावहारिक सीख, नीति-नियम और तार्किक क्षमता को बहुत ही आसानी से समझ सकते हैं।

  • 'मैं मलाला हूँ' (I Am Malala) – मलाला यूसुफजई: शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष करने वाली एक युवा लड़की की यह सच्ची कहानी विपरीत परिस्थितियों में भी अदम्य साहस और दृढ़ निश्चय का पाठ पढ़ाती है।

  • 'द अल्केमिस्ट' (The Alchemist) – पाउलो कोएलो: यह विश्व प्रसिद्ध उपन्यास बड़े बच्चों (कक्षा 9 और 10) को अपने सपनों की पहचान करने और अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए प्रेरित करता है (इसका हिंदी अनुवाद आसानी से उपलब्ध है)।

धन्यवाद! जय हिन्द!

आप सभी उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ें, यही शुभकामनाएँ।

 जय हिंद! जय भारत!

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार 

Prayas - August 2026

 

Year - 7                                        Month - August 2026                                  Issue - 80

मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,

जीवन एक ऐसी यात्रा है जिसमें हर कदम पर नई चुनौतियाँ और नए अवसर हमारा इंतज़ार करते हैं। विद्यार्थी जीवन इस यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण नींव है, क्योंकि यही वह समय होता है जब हम अपने भविष्य की नींव रखते हैं। स्कूल के दिन केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होते, बल्कि यह वह दौर होता है जब हम अपने सपनों को पहचानते हैं, अपनी क्षमताओं को तराशते हैं और एक बेहतर इंसान बनने की दिशा में आगे बढ़ते हैं। आइए, इस लेख के माध्यम से हम कुछ ऐसी बातों पर विचार करें जो हर विद्यार्थी के जीवन को प्रेरणा से भर सकती हैं।

सपने देखना ज़रूरी है

हर बड़ी सफलता की शुरुआत एक छोटे से सपने से होती है। महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था कि सपने वो नहीं जो हम सोते समय देखते हैं, बल्कि सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें। सपने देखना कोई अपराध नहीं, बल्कि यह हमारी सोच को विस्तार देने का एक ज़रिया है। जब हम कुछ बड़ा हासिल करने का सपना देखते हैं, तो हमारा मन स्वतः ही उस दिशा में काम करना शुरू कर देता है।

लेकिन केवल सपने देखना काफी नहीं है। सपनों को साकार करने के लिए मेहनत, धैर्य और निरंतरता की आवश्यकता होती है। जो विद्यार्थी अपने सपनों के प्रति गंभीर होते हैं, वे हर दिन उस दिशा में एक छोटा-सा कदम उठाते हैं। याद रखें, एक-एक छोटा कदम मिलकर ही एक लंबी यात्रा को पूरा करता है।

असफलता से डरें नहीं

अक्सर विद्यार्थी असफलता के डर से नए प्रयास करने से बचते हैं। परीक्षा में कम अंक आना, किसी प्रतियोगिता में हार जाना, या किसी काम में असफल हो जाना - ये सब जीवन का हिस्सा हैं। असफलता का कोई अंत नहीं है, बल्कि यह सीखने का एक अवसर है। थॉमस एडिसन ने बिजली का बल्ब बनाने से पहले हज़ारों बार असफलता का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका मानना था कि हर असफल प्रयास उन्हें सफलता के एक कदम और करीब ले जाता है।

विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि असफलता से घबराने की बजाय उससे सीख लेनी चाहिए। जब हम गलतियाँ करते हैं, तभी हमें अपनी कमियों का पता चलता है और हम उन्हें सुधारने का प्रयास करते हैं। इसलिए असफलता को अपने दुश्मन के रूप में नहीं, बल्कि एक शिक्षक के रूप में देखें, जो हमें बेहतर बनने का रास्ता दिखाती है।

कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जो विद्यार्थी नियमित रूप से मेहनत करते हैं, अनुशासन का पालन करते हैं और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहते हैं, वही अंततः सफलता प्राप्त करते हैं। पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, कला और अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी ज़रूरी है, क्योंकि यह हमारे व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करती है।

समय प्रबंधन एक ऐसा कौशल है जो हर विद्यार्थी को सीखना चाहिए। दिन के 24 घंटों में से कुछ समय पढ़ाई के लिए, कुछ समय खेल के लिए, कुछ समय परिवार के साथ बिताने के लिए, और कुछ समय आराम के लिए निकालना बेहद ज़रूरी है। जो विद्यार्थी अपने समय का सही उपयोग करना सीख जाते हैं, वे जीवन में हर क्षेत्र में सफल होते हैं।

इसके अलावा, निरंतरता (consistency) सफलता की कुंजी है। एक दिन में बहुत अधिक मेहनत करने से बेहतर है कि हम रोज़ाना थोड़ा-थोड़ा प्रयास करें। जैसे बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही निरंतर प्रयास से बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

आत्मविश्वास रखें

आत्मविश्वास सफलता की पहली सीढ़ी है। जो व्यक्ति खुद पर विश्वास नहीं करता, वह कभी भी अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाता। विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखना चाहिए और दूसरों से अपनी तुलना करने से बचना चाहिए। हर व्यक्ति अद्वितीय होता है, और हर किसी की अपनी गति और अपना रास्ता होता है।

कई बार हम दूसरों को देखकर निराश हो जाते हैं कि वे हमसे आगे हैं। लेकिन यह याद रखना ज़रूरी है कि जीवन कोई दौड़ नहीं है जहाँ सबको एक साथ एक ही रेखा पर दौड़ना है। हर व्यक्ति का अपना समय होता है, अपनी यात्रा होती है। इसलिए अपनी तुलना केवल अपने कल के स्वयं से करें, न कि दूसरों से।

अच्छी आदतें अपनाएँ

सफल जीवन की नींव अच्छी आदतों पर टिकी होती है। सुबह जल्दी उठना, नियमित व्यायाम करना, स्वस्थ भोजन करना, समय पर सोना और पढ़ाई के लिए एक निश्चित समय निर्धारित करना - ये सभी आदतें विद्यार्थी जीवन को अनुशासित बनाती हैं। शुरुआत में ये आदतें कठिन लग सकती हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये हमारे स्वभाव का हिस्सा बन जाती हैं और हमें जीवन में आगे बढ़ने में मदद करती हैं।

इसके साथ ही, पढ़ने की आदत भी बेहद महत्वपूर्ण है। केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर, विद्यार्थियों को सामान्य ज्ञान बढ़ाने वाली किताबें, जीवनी, और प्रेरणादायक साहित्य भी पढ़ना चाहिए। इससे न केवल ज्ञान बढ़ता है, बल्कि सोचने की क्षमता भी विकसित होती है।

शिक्षकों और माता-पिता का सम्मान करें

विद्यार्थी जीवन में शिक्षकों और माता-पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वे हमारे मार्गदर्शक होते हैं, जो हमें सही दिशा दिखाते हैं। उनका सम्मान करना और उनकी सलाह को गंभीरता से लेना हमारे विकास के लिए आवश्यक है। जब भी कोई कठिनाई आए, तो झिझकने की बजाय अपने शिक्षकों और माता-पिता से खुलकर बात करें। वे अनुभव से भरे होते हैं और हमारी समस्याओं का समाधान खोजने में हमारी मदद कर सकते हैं।

चुनौतियों को अवसर में बदलें

जीवन में चुनौतियाँ आना स्वाभाविक है। कठिन विषय, परीक्षा का दबाव, प्रतिस्पर्धा - ये सब विद्यार्थी जीवन का हिस्सा हैं। लेकिन सफल व्यक्ति वही होते हैं जो इन चुनौतियों से घबराने की बजाय उन्हें एक अवसर के रूप में देखते हैं। हर चुनौती हमें कुछ नया सिखाती है और हमें मज़बूत बनाती है।

जब भी आपको लगे कि कोई काम बहुत कठिन है, तो याद रखें कि हर बड़ी उपलब्धि किसी न किसी कठिन प्रयास का ही परिणाम होती है। जितनी बड़ी चुनौती होगी, उतना ही बड़ा उसकी सफलता का आनंद भी होगा।

सकारात्मक सोच का महत्व

हमारी सोच ही हमारे जीवन की दिशा तय करती है। सकारात्मक सोच रखने वाले विद्यार्थी हर परिस्थिति में अवसर ढूंढ लेते हैं, जबकि नकारात्मक सोच रखने वाले हर अवसर में भी समस्या देखते हैं। इसलिए यह ज़रूरी है कि हम अपनी सोच को सकारात्मक बनाए रखें। कठिन समय में भी उम्मीद का दामन न छोड़ें और विश्वास रखें कि मेहनत का फल अवश्य मिलता है।

सकारात्मक सोच के साथ-साथ अच्छे दोस्तों की संगति भी महत्वपूर्ण है। ऐसे मित्र चुनें जो आपको प्रेरित करें, आपका उत्साह बढ़ाएँ और कठिन समय में आपका साथ दें।


प्रिय विद्यार्थियों, याद रखें कि आप सभी में असीम क्षमता है। आवश्यकता है तो बस उसे पहचानने और उसे निखारने की। सपने देखें, मेहनत करें, असफलताओं से सीखें, और कभी हार न मानें। सफलता का रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन जो लोग धैर्य और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ते रहते हैं, वे अंततः अपनी मंज़िल तक पहुँच ही जाते हैं।

आज का विद्यार्थी ही कल का भविष्य निर्माता है। आप ही वे लोग हैं जो आने वाले समय में समाज और देश का नेतृत्व करेंगे। इसलिए अपने आप पर विश्वास रखें, अपने सपनों को साकार करने के लिए पूरी लगन से जुटे रहें, और हमेशा याद रखें - "जो ठान लिया, वो करके ही रहेंगे।" आपका उज्ज्वल भविष्य आपकी मेहनत और लगन का इंतज़ार कर रहा है। बस आगे बढ़ते रहें, क्योंकि रुकना ही एकमात्र हार है, और चलते रहना ही सच्ची जीत।

धन्यवाद! जय हिन्द!

आप सभी उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ें, यही शुभकामनाएँ।

 जय हिंद! जय भारत!

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार 

KVS SPLITUP SYLLABUS 2026-27

 

                                 

           KVS SPLITUP SYLLABUS 2026-27

Prayas - July 2026

   

Year - 7                                        Month - July 2026                                  Issue - 79

मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,

जैसे-जैसे परीक्षा के दिन नज़दीक आते हैं, हम सबके मन में कहीं न कहीं थोड़ी घबराहट, थोड़ा तनाव और थोड़ी बेचैनी होने लगती है। यह बिल्कुल स्वाभाविक है। लेकिन आज मैं आपसे यह कहना चाहता हूँ कि यह परीक्षा केवल कागज़ पर लिखे कुछ सवालों का जवाब देना नहीं है, बल्कि यह हमारी मेहनत, हमारे अनुशासन और हमारे आत्मविश्वास की एक परीक्षा है।

परीक्षा का असली अर्थ

सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि परीक्षा हमारे जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक पड़ाव है। यह हमें यह जानने का अवसर देती है कि हमने साल भर जो पढ़ा है, उसे हम कितना समझ पाए हैं। कई बार हम परीक्षा को लेकर इतने डर जाते हैं कि हम यह भूल जाते हैं कि परीक्षा हमारी क्षमता जानने का एक ज़रिया है, न कि हमारी पहचान तय करने वाला कोई अंतिम निर्णय। एक अच्छा या बुरा परिणाम हमें परिभाषित नहीं करता — हमारी मेहनत, हमारा चरित्र और हमारा दृष्टिकोण ही हमें परिभाषित करता है।

समय का सही प्रबंधन

मित्रों, सफलता की पहली सीढ़ी है समय का सही प्रबंधन। जब हम अपने दिन को सही ढंग से बाँटते हैं, तो हमें पढ़ाई का बोझ महसूस नहीं होता। रोज़ थोड़ा-थोड़ा पढ़ना, आखिरी रात में सब कुछ रटने की कोशिश करने से कहीं बेहतर है। एक समय-सारणी बनाइए, जिसमें हर विषय को उचित समय मिले, और उस सारणी का ईमानदारी से पालन कीजिए। साथ ही यह भी याद रखिए कि लगातार पढ़ते रहना ही समाधान नहीं है — बीच-बीच में छोटे विश्राम लेना, दिमाग को ताज़ा रखना भी उतना ही ज़रूरी है। एक थका हुआ मस्तिष्क उतनी अच्छी तरह याद नहीं रख पाता, जितना एक तरोताज़ा मस्तिष्क रख पाता है।

आत्मविश्वास ही असली ताकत है

हमारे मन में जो सबसे बड़ा शत्रु छिपा होता है, वह है — स्वयं पर संदेह। जब हम बार-बार यह सोचते हैं कि "मुझसे नहीं होगा," "मैं फेल हो जाऊँगा," "मेरी तैयारी अधूरी है," तो यही नकारात्मक विचार हमारी असली क्षमता को दबा देते हैं। हमें अपने आप पर विश्वास रखना सीखना होगा। याद रखिए, आपने पूरे साल जो मेहनत की है, वह व्यर्थ नहीं जा सकती। हर दिन जो आपने कक्षा में सीखा, हर नोट्स जो आपने बनाए, हर सवाल जो आपने हल किया — वह सब आपके भीतर संचित है। बस ज़रूरत है उस पर विश्वास करने की।

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को स्कूल में कमज़ोर विद्यार्थी समझा जाता था, परंतु उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आगे चलकर दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिकों में गिने गए। इसी तरह हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन भी हमें यही सिखाता है कि संघर्ष और मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने कहा था — "सपने वो नहीं जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।" यह पंक्ति हमें यह प्रेरणा देती है कि हमें अपने लक्ष्यों के प्रति इतना समर्पित होना चाहिए कि वे हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन जाएँ।

तनाव को कैसे संभालें

परीक्षा के दिनों में तनाव होना आम बात है, परंतु अत्यधिक तनाव हमारी सोचने-समझने की शक्ति को कमज़ोर कर देता है। इसलिए ज़रूरी है कि हम गहरी साँस लेने के अभ्यास करें, पर्याप्त नींद लें, और सकारात्मक सोच बनाए रखें। अपने माता-पिता और शिक्षकों से खुलकर बात कीजिए, अपनी चिंताएँ साझा कीजिए। याद रखिए, आप अकेले नहीं हैं — आपके परिवार, शिक्षक और मित्र हमेशा आपके साथ खड़े हैं। किसी भी सवाल में अटकने पर घबराने की बजाय, शांत मन से उसे समझने की कोशिश कीजिए।

साथ ही, अपनी तुलना दूसरों से मत कीजिए। हर विद्यार्थी की अपनी गति होती है, अपनी क्षमता होती है। जो एक विद्यार्थी एक घंटे में समझ लेता है, हो सकता है दूसरे को उसी बात को समझने में थोड़ा अधिक समय लगे — इसका यह अर्थ कदापि नहीं कि वह कमज़ोर है। अपनी प्रगति को स्वयं के कल के प्रयासों से मापिए, किसी और से नहीं।

अनुशासन और नियमितता

सफलता कोई चमत्कार नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास और अनुशासन का परिणाम होती है। जो विद्यार्थी नियमित रूप से पढ़ाई करते हैं, संशय होने पर तुरंत अपने शिक्षकों से पूछते हैं, और पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास करते हैं, वे परीक्षा के समय अधिक आत्मविश्वासी महसूस करते हैं। रिवीज़न को कभी हल्के में मत लीजिए। जो पढ़ा है उसे बार-बार दोहराना, उसे स्थायी रूप से याद रखने में मदद करता है। स्वयं परीक्षण (self-test) करना भी एक बहुत प्रभावी तरीका है — इससे हमें यह पता चलता है कि हमें किस विषय पर और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है।

संतुलित जीवनशैली

परीक्षा के दिनों में स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पढ़ाई करना। पौष्टिक भोजन कीजिए, पर्याप्त पानी पीजिए, और कुछ समय शारीरिक गतिविधियों के लिए भी निकालिए। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क वास करता है। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से थोड़ी दूरी बनाना भी इस समय बहुत लाभदायक सिद्ध होता है, क्योंकि यह हमारा ध्यान और समय दोनों छीन लेता है।

अंतिम संदेश

अंत में, मैं आप सभी से यही कहना चाहूँगा — परिणाम की चिंता करने की बजाय, अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित कीजिए। जो आपके हाथ में है, वह है ईमानदार मेहनत, नियमित अभ्यास और सकारात्मक सोच। परिणाम अपने आप अच्छा आएगा, क्योंकि जैसा प्रयास होगा, वैसा ही फल मिलेगा। असफलता से डरिए मत, क्योंकि असफलता भी हमें सिखाती है और हमें और मज़बूत बनाती है। हर परीक्षा हमें कुछ नया सिखाती है, चाहे परिणाम कुछ भी हो।

याद रखिए — आप में असीम क्षमता है। बस उस पर विश्वास कीजिए, मेहनत करते रहिए, और अपने सपनों की ओर दृढ़ता से बढ़ते रहिए। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी अपनी आने वाली परीक्षाओं में सफलता के नए शिखर छुएँगे।

धन्यवाद! जय हिन्द!

आप सभी उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ें, यही शुभकामनाएँ।

 जय हिंद! जय भारत!

धन्यवाद

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार