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Prayas - August 2026

 

Year - 7                                        Month - August 2026                                  Issue - 80

मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,

जीवन एक ऐसी यात्रा है जिसमें हर कदम पर नई चुनौतियाँ और नए अवसर हमारा इंतज़ार करते हैं। विद्यार्थी जीवन इस यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण नींव है, क्योंकि यही वह समय होता है जब हम अपने भविष्य की नींव रखते हैं। स्कूल के दिन केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होते, बल्कि यह वह दौर होता है जब हम अपने सपनों को पहचानते हैं, अपनी क्षमताओं को तराशते हैं और एक बेहतर इंसान बनने की दिशा में आगे बढ़ते हैं। आइए, इस लेख के माध्यम से हम कुछ ऐसी बातों पर विचार करें जो हर विद्यार्थी के जीवन को प्रेरणा से भर सकती हैं।

सपने देखना ज़रूरी है

हर बड़ी सफलता की शुरुआत एक छोटे से सपने से होती है। महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था कि सपने वो नहीं जो हम सोते समय देखते हैं, बल्कि सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें। सपने देखना कोई अपराध नहीं, बल्कि यह हमारी सोच को विस्तार देने का एक ज़रिया है। जब हम कुछ बड़ा हासिल करने का सपना देखते हैं, तो हमारा मन स्वतः ही उस दिशा में काम करना शुरू कर देता है।

लेकिन केवल सपने देखना काफी नहीं है। सपनों को साकार करने के लिए मेहनत, धैर्य और निरंतरता की आवश्यकता होती है। जो विद्यार्थी अपने सपनों के प्रति गंभीर होते हैं, वे हर दिन उस दिशा में एक छोटा-सा कदम उठाते हैं। याद रखें, एक-एक छोटा कदम मिलकर ही एक लंबी यात्रा को पूरा करता है।

असफलता से डरें नहीं

अक्सर विद्यार्थी असफलता के डर से नए प्रयास करने से बचते हैं। परीक्षा में कम अंक आना, किसी प्रतियोगिता में हार जाना, या किसी काम में असफल हो जाना - ये सब जीवन का हिस्सा हैं। असफलता का कोई अंत नहीं है, बल्कि यह सीखने का एक अवसर है। थॉमस एडिसन ने बिजली का बल्ब बनाने से पहले हज़ारों बार असफलता का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका मानना था कि हर असफल प्रयास उन्हें सफलता के एक कदम और करीब ले जाता है।

विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि असफलता से घबराने की बजाय उससे सीख लेनी चाहिए। जब हम गलतियाँ करते हैं, तभी हमें अपनी कमियों का पता चलता है और हम उन्हें सुधारने का प्रयास करते हैं। इसलिए असफलता को अपने दुश्मन के रूप में नहीं, बल्कि एक शिक्षक के रूप में देखें, जो हमें बेहतर बनने का रास्ता दिखाती है।

कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जो विद्यार्थी नियमित रूप से मेहनत करते हैं, अनुशासन का पालन करते हैं और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहते हैं, वही अंततः सफलता प्राप्त करते हैं। पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, कला और अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी ज़रूरी है, क्योंकि यह हमारे व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करती है।

समय प्रबंधन एक ऐसा कौशल है जो हर विद्यार्थी को सीखना चाहिए। दिन के 24 घंटों में से कुछ समय पढ़ाई के लिए, कुछ समय खेल के लिए, कुछ समय परिवार के साथ बिताने के लिए, और कुछ समय आराम के लिए निकालना बेहद ज़रूरी है। जो विद्यार्थी अपने समय का सही उपयोग करना सीख जाते हैं, वे जीवन में हर क्षेत्र में सफल होते हैं।

इसके अलावा, निरंतरता (consistency) सफलता की कुंजी है। एक दिन में बहुत अधिक मेहनत करने से बेहतर है कि हम रोज़ाना थोड़ा-थोड़ा प्रयास करें। जैसे बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही निरंतर प्रयास से बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

आत्मविश्वास रखें

आत्मविश्वास सफलता की पहली सीढ़ी है। जो व्यक्ति खुद पर विश्वास नहीं करता, वह कभी भी अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाता। विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखना चाहिए और दूसरों से अपनी तुलना करने से बचना चाहिए। हर व्यक्ति अद्वितीय होता है, और हर किसी की अपनी गति और अपना रास्ता होता है।

कई बार हम दूसरों को देखकर निराश हो जाते हैं कि वे हमसे आगे हैं। लेकिन यह याद रखना ज़रूरी है कि जीवन कोई दौड़ नहीं है जहाँ सबको एक साथ एक ही रेखा पर दौड़ना है। हर व्यक्ति का अपना समय होता है, अपनी यात्रा होती है। इसलिए अपनी तुलना केवल अपने कल के स्वयं से करें, न कि दूसरों से।

अच्छी आदतें अपनाएँ

सफल जीवन की नींव अच्छी आदतों पर टिकी होती है। सुबह जल्दी उठना, नियमित व्यायाम करना, स्वस्थ भोजन करना, समय पर सोना और पढ़ाई के लिए एक निश्चित समय निर्धारित करना - ये सभी आदतें विद्यार्थी जीवन को अनुशासित बनाती हैं। शुरुआत में ये आदतें कठिन लग सकती हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये हमारे स्वभाव का हिस्सा बन जाती हैं और हमें जीवन में आगे बढ़ने में मदद करती हैं।

इसके साथ ही, पढ़ने की आदत भी बेहद महत्वपूर्ण है। केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर, विद्यार्थियों को सामान्य ज्ञान बढ़ाने वाली किताबें, जीवनी, और प्रेरणादायक साहित्य भी पढ़ना चाहिए। इससे न केवल ज्ञान बढ़ता है, बल्कि सोचने की क्षमता भी विकसित होती है।

शिक्षकों और माता-पिता का सम्मान करें

विद्यार्थी जीवन में शिक्षकों और माता-पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वे हमारे मार्गदर्शक होते हैं, जो हमें सही दिशा दिखाते हैं। उनका सम्मान करना और उनकी सलाह को गंभीरता से लेना हमारे विकास के लिए आवश्यक है। जब भी कोई कठिनाई आए, तो झिझकने की बजाय अपने शिक्षकों और माता-पिता से खुलकर बात करें। वे अनुभव से भरे होते हैं और हमारी समस्याओं का समाधान खोजने में हमारी मदद कर सकते हैं।

चुनौतियों को अवसर में बदलें

जीवन में चुनौतियाँ आना स्वाभाविक है। कठिन विषय, परीक्षा का दबाव, प्रतिस्पर्धा - ये सब विद्यार्थी जीवन का हिस्सा हैं। लेकिन सफल व्यक्ति वही होते हैं जो इन चुनौतियों से घबराने की बजाय उन्हें एक अवसर के रूप में देखते हैं। हर चुनौती हमें कुछ नया सिखाती है और हमें मज़बूत बनाती है।

जब भी आपको लगे कि कोई काम बहुत कठिन है, तो याद रखें कि हर बड़ी उपलब्धि किसी न किसी कठिन प्रयास का ही परिणाम होती है। जितनी बड़ी चुनौती होगी, उतना ही बड़ा उसकी सफलता का आनंद भी होगा।

सकारात्मक सोच का महत्व

हमारी सोच ही हमारे जीवन की दिशा तय करती है। सकारात्मक सोच रखने वाले विद्यार्थी हर परिस्थिति में अवसर ढूंढ लेते हैं, जबकि नकारात्मक सोच रखने वाले हर अवसर में भी समस्या देखते हैं। इसलिए यह ज़रूरी है कि हम अपनी सोच को सकारात्मक बनाए रखें। कठिन समय में भी उम्मीद का दामन न छोड़ें और विश्वास रखें कि मेहनत का फल अवश्य मिलता है।

सकारात्मक सोच के साथ-साथ अच्छे दोस्तों की संगति भी महत्वपूर्ण है। ऐसे मित्र चुनें जो आपको प्रेरित करें, आपका उत्साह बढ़ाएँ और कठिन समय में आपका साथ दें।


प्रिय विद्यार्थियों, याद रखें कि आप सभी में असीम क्षमता है। आवश्यकता है तो बस उसे पहचानने और उसे निखारने की। सपने देखें, मेहनत करें, असफलताओं से सीखें, और कभी हार न मानें। सफलता का रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन जो लोग धैर्य और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ते रहते हैं, वे अंततः अपनी मंज़िल तक पहुँच ही जाते हैं।

आज का विद्यार्थी ही कल का भविष्य निर्माता है। आप ही वे लोग हैं जो आने वाले समय में समाज और देश का नेतृत्व करेंगे। इसलिए अपने आप पर विश्वास रखें, अपने सपनों को साकार करने के लिए पूरी लगन से जुटे रहें, और हमेशा याद रखें - "जो ठान लिया, वो करके ही रहेंगे।" आपका उज्ज्वल भविष्य आपकी मेहनत और लगन का इंतज़ार कर रहा है। बस आगे बढ़ते रहें, क्योंकि रुकना ही एकमात्र हार है, और चलते रहना ही सच्ची जीत।

धन्यवाद! जय हिन्द!

आप सभी उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ें, यही शुभकामनाएँ।

 जय हिंद! जय भारत!

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार 

KVS SPLITUP SYLLABUS 2026-27

 

                                 

           KVS SPLITUP SYLLABUS 2026-27

Prayas - July 2026

   

Year - 7                                        Month - July 2026                                  Issue - 79

मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,

जैसे-जैसे परीक्षा के दिन नज़दीक आते हैं, हम सबके मन में कहीं न कहीं थोड़ी घबराहट, थोड़ा तनाव और थोड़ी बेचैनी होने लगती है। यह बिल्कुल स्वाभाविक है। लेकिन आज मैं आपसे यह कहना चाहता हूँ कि यह परीक्षा केवल कागज़ पर लिखे कुछ सवालों का जवाब देना नहीं है, बल्कि यह हमारी मेहनत, हमारे अनुशासन और हमारे आत्मविश्वास की एक परीक्षा है।

परीक्षा का असली अर्थ

सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि परीक्षा हमारे जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक पड़ाव है। यह हमें यह जानने का अवसर देती है कि हमने साल भर जो पढ़ा है, उसे हम कितना समझ पाए हैं। कई बार हम परीक्षा को लेकर इतने डर जाते हैं कि हम यह भूल जाते हैं कि परीक्षा हमारी क्षमता जानने का एक ज़रिया है, न कि हमारी पहचान तय करने वाला कोई अंतिम निर्णय। एक अच्छा या बुरा परिणाम हमें परिभाषित नहीं करता — हमारी मेहनत, हमारा चरित्र और हमारा दृष्टिकोण ही हमें परिभाषित करता है।

समय का सही प्रबंधन

मित्रों, सफलता की पहली सीढ़ी है समय का सही प्रबंधन। जब हम अपने दिन को सही ढंग से बाँटते हैं, तो हमें पढ़ाई का बोझ महसूस नहीं होता। रोज़ थोड़ा-थोड़ा पढ़ना, आखिरी रात में सब कुछ रटने की कोशिश करने से कहीं बेहतर है। एक समय-सारणी बनाइए, जिसमें हर विषय को उचित समय मिले, और उस सारणी का ईमानदारी से पालन कीजिए। साथ ही यह भी याद रखिए कि लगातार पढ़ते रहना ही समाधान नहीं है — बीच-बीच में छोटे विश्राम लेना, दिमाग को ताज़ा रखना भी उतना ही ज़रूरी है। एक थका हुआ मस्तिष्क उतनी अच्छी तरह याद नहीं रख पाता, जितना एक तरोताज़ा मस्तिष्क रख पाता है।

आत्मविश्वास ही असली ताकत है

हमारे मन में जो सबसे बड़ा शत्रु छिपा होता है, वह है — स्वयं पर संदेह। जब हम बार-बार यह सोचते हैं कि "मुझसे नहीं होगा," "मैं फेल हो जाऊँगा," "मेरी तैयारी अधूरी है," तो यही नकारात्मक विचार हमारी असली क्षमता को दबा देते हैं। हमें अपने आप पर विश्वास रखना सीखना होगा। याद रखिए, आपने पूरे साल जो मेहनत की है, वह व्यर्थ नहीं जा सकती। हर दिन जो आपने कक्षा में सीखा, हर नोट्स जो आपने बनाए, हर सवाल जो आपने हल किया — वह सब आपके भीतर संचित है। बस ज़रूरत है उस पर विश्वास करने की।

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को स्कूल में कमज़ोर विद्यार्थी समझा जाता था, परंतु उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आगे चलकर दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिकों में गिने गए। इसी तरह हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन भी हमें यही सिखाता है कि संघर्ष और मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने कहा था — "सपने वो नहीं जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।" यह पंक्ति हमें यह प्रेरणा देती है कि हमें अपने लक्ष्यों के प्रति इतना समर्पित होना चाहिए कि वे हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन जाएँ।

तनाव को कैसे संभालें

परीक्षा के दिनों में तनाव होना आम बात है, परंतु अत्यधिक तनाव हमारी सोचने-समझने की शक्ति को कमज़ोर कर देता है। इसलिए ज़रूरी है कि हम गहरी साँस लेने के अभ्यास करें, पर्याप्त नींद लें, और सकारात्मक सोच बनाए रखें। अपने माता-पिता और शिक्षकों से खुलकर बात कीजिए, अपनी चिंताएँ साझा कीजिए। याद रखिए, आप अकेले नहीं हैं — आपके परिवार, शिक्षक और मित्र हमेशा आपके साथ खड़े हैं। किसी भी सवाल में अटकने पर घबराने की बजाय, शांत मन से उसे समझने की कोशिश कीजिए।

साथ ही, अपनी तुलना दूसरों से मत कीजिए। हर विद्यार्थी की अपनी गति होती है, अपनी क्षमता होती है। जो एक विद्यार्थी एक घंटे में समझ लेता है, हो सकता है दूसरे को उसी बात को समझने में थोड़ा अधिक समय लगे — इसका यह अर्थ कदापि नहीं कि वह कमज़ोर है। अपनी प्रगति को स्वयं के कल के प्रयासों से मापिए, किसी और से नहीं।

अनुशासन और नियमितता

सफलता कोई चमत्कार नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास और अनुशासन का परिणाम होती है। जो विद्यार्थी नियमित रूप से पढ़ाई करते हैं, संशय होने पर तुरंत अपने शिक्षकों से पूछते हैं, और पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास करते हैं, वे परीक्षा के समय अधिक आत्मविश्वासी महसूस करते हैं। रिवीज़न को कभी हल्के में मत लीजिए। जो पढ़ा है उसे बार-बार दोहराना, उसे स्थायी रूप से याद रखने में मदद करता है। स्वयं परीक्षण (self-test) करना भी एक बहुत प्रभावी तरीका है — इससे हमें यह पता चलता है कि हमें किस विषय पर और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है।

संतुलित जीवनशैली

परीक्षा के दिनों में स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पढ़ाई करना। पौष्टिक भोजन कीजिए, पर्याप्त पानी पीजिए, और कुछ समय शारीरिक गतिविधियों के लिए भी निकालिए। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क वास करता है। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से थोड़ी दूरी बनाना भी इस समय बहुत लाभदायक सिद्ध होता है, क्योंकि यह हमारा ध्यान और समय दोनों छीन लेता है।

अंतिम संदेश

अंत में, मैं आप सभी से यही कहना चाहूँगा — परिणाम की चिंता करने की बजाय, अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित कीजिए। जो आपके हाथ में है, वह है ईमानदार मेहनत, नियमित अभ्यास और सकारात्मक सोच। परिणाम अपने आप अच्छा आएगा, क्योंकि जैसा प्रयास होगा, वैसा ही फल मिलेगा। असफलता से डरिए मत, क्योंकि असफलता भी हमें सिखाती है और हमें और मज़बूत बनाती है। हर परीक्षा हमें कुछ नया सिखाती है, चाहे परिणाम कुछ भी हो।

याद रखिए — आप में असीम क्षमता है। बस उस पर विश्वास कीजिए, मेहनत करते रहिए, और अपने सपनों की ओर दृढ़ता से बढ़ते रहिए। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी अपनी आने वाली परीक्षाओं में सफलता के नए शिखर छुएँगे।

धन्यवाद! जय हिन्द!

आप सभी उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ें, यही शुभकामनाएँ।

 जय हिंद! जय भारत!

धन्यवाद

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार 

June 2026

   

Year - 7                           Month - June 2026                              Issue - 78

मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,

क्या हम सब अपनी असली क्षमता को पहचानते हैं? क्या हमने कभी रुककर सोचा है कि हमारे भीतर कितनी बड़ी शक्ति छिपी हुई है? आज मैं आपसे कुछ ऐसी बातें साझा करना चाहता हूँ, जो शायद आपकी सोच को बदल दें, आपके अंदर के उस सोए हुए जज़्बे को जगा दें, जो हर सफलता की पहली सीढ़ी होता है।

पहला विचार — सपने देखना कोई अपराध नहीं है

हम अक्सर सुनते हैं कि "बड़े सपने मत देखो, हकीकत में जियो।" लेकिन मैं आपसे कहना चाहता हूँ — यह सोच बदलनी होगी। हर वह इंसान जिसने आज इतिहास रचा है, उसने पहले एक सपना देखा था। एक साधारण व्यक्ति जब अपने सपनों पर विश्वास करता है, तभी वह असाधारण बनता है।

सोचिए, अगर राइट बंधुओं ने आसमान में उड़ने का सपना न देखा होता, तो क्या आज हम हवाई जहाज़ में यात्रा कर पाते? अगर डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने एक साधारण मछुआरे के बेटे होते हुए भी बड़े सपने न देखे होते, तो क्या भारत का मिसाइल कार्यक्रम इतना सफल होता? सपने देखना कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए साथियों, आज से डरना छोड़िए और खुलकर सपने देखिए — बड़े, ऊँचे और साहसी सपने।

दूसरा विचार — असफलता, सफलता की सीढ़ी है

अक्सर हम असफलता से डरते हैं। परीक्षा में कम अंक आने पर, किसी प्रतियोगिता में हार जाने पर, या किसी काम में नाकाम होने पर हम खुद को कमज़ोर समझने लगते हैं। लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूँ — असफलता कोई अंत नहीं है, यह तो एक नई शुरुआत का संकेत है।

थॉमस एडिसन ने बल्ब बनाने में हज़ारों बार असफलता का सामना किया। जब किसी ने उनसे पूछा कि इतनी बार असफल होकर आपको कैसा लगता है, तो उन्होंने कहा — "मैं असफल नहीं हुआ, मैंने केवल हज़ार ऐसे तरीके खोजे जो काम नहीं करते।" यही सोच हमें अपनानी चाहिए। जब भी आप गिरें, याद रखिए कि गिरना बुरी बात नहीं है, बल्कि दोबारा न उठना बुरी बात है।

क्रिकेट के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को भी अपने करियर की शुरुआत में कई बार असफलता मिली, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज वे लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। तो साथियों, अगली बार जब आप असफल हों, तो निराश मत होइए — बल्कि उस असफलता से सीखिए और आगे बढ़िए।

तीसरा विचार — मेहनत का कोई विकल्प नहीं

हम अक्सर सफल लोगों की कहानियाँ सुनते हैं और सोचते हैं कि उन्हें यह सब आसानी से मिल गया। लेकिन सच्चाई यह है कि सफलता के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत, त्याग और अनुशासन छिपा होता है। कोई भी सफलता रातों-रात नहीं मिलती।

एक किसान जब बीज बोता है, तो वह तुरंत फल की उम्मीद नहीं करता। वह धैर्य रखता है, नियमित रूप से पानी देता है, देखभाल करता है, और समय आने पर उसे फल मिलता है। ठीक इसी तरह, हमें भी अपने लक्ष्यों के लिए धैर्य और निरंतर प्रयास की आवश्यकता है। स्कूल के ये वर्ष हमारे जीवन की नींव हैं। जो मेहनत हम आज करेंगे, वही कल हमारे भविष्य का निर्माण करेगी।

याद रखिए, प्रतिभा केवल एक शुरुआत है। असली सफलता उन्हीं को मिलती है, जो लगातार अभ्यास करते हैं, जो हार मानने के बजाय बार-बार कोशिश करते हैं। जैसा कि कहा जाता है — "मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे।"

चौथा विचार — समय का महत्व समझिए

दोस्तों, समय सबसे कीमती संपत्ति है, जो एक बार बीत जाने के बाद कभी वापस नहीं आती। पैसा खो जाए तो दोबारा कमाया जा सकता है, लेकिन बीता हुआ समय कभी वापस नहीं मिलता। इसलिए हमें अपने समय का सही उपयोग करना सीखना होगा।

आज के दौर में मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और तमाम तरह के मनोरंजन हमारा बहुमूल्य समय छीन रहे हैं। यह ज़रूरी नहीं कि हम इनसे पूरी तरह दूर हो जाएँ, लेकिन संतुलन बनाना बेहद आवश्यक है। अपने लक्ष्यों को प्राथमिकता दीजिए, एक समय-सारणी बनाइए और उसका पालन कीजिए। जो विद्यार्थी समय का सम्मान करना सीख जाता है, वह जीवन में कभी पीछे नहीं रहता।

पाँचवाँ विचार — खुद पर विश्वास रखिए

साथियों, दुनिया में सबसे बड़ी ताकत आत्मविश्वास है। जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करेंगे, तब तक कोई और भी आप पर विश्वास नहीं करेगा। बहुत बार हम दूसरों से अपनी तुलना करने लगते हैं और खुद को कमतर आँकने लगते हैं। लेकिन याद रखिए, हर इंसान अनोखा है। जिस तरह एक बीज को पेड़ बनने में समय लगता है, उसी तरह आपकी प्रतिभा को निखरने में भी समय लग सकता है।

अपनी तुलना दूसरों से मत कीजिए, बल्कि कल के अपने आप से कीजिए। खुद से पूछिए — "क्या मैं आज कल से बेहतर हूँ?" यह सवाल आपको हर दिन आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। अपनी कमजोरियों को स्वीकार कीजिए, लेकिन उन्हें अपनी पहचान मत बनने दीजिए। अपनी खूबियों पर ध्यान दीजिए और उन्हें निखारने में मेहनत कीजिए।

छठा विचार — अच्छे संस्कार और चरित्र सबसे बड़ी पूंजी है

दोस्तों, शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। असली शिक्षा वह है, जो हमें एक अच्छा इंसान बनाती है। आप कितने भी सफल क्यों न हो जाएँ, अगर आपके अंदर विनम्रता, ईमानदारी और दूसरों के प्रति सम्मान नहीं है, तो वह सफलता अधूरी है।

अपने माता-पिता का सम्मान कीजिए, जिन्होंने आपको यहाँ तक पहुँचाने के लिए दिन-रात मेहनत की है। अपने शिक्षकों का आदर कीजिए, जो आपके भविष्य को गढ़ने में लगे हुए हैं। अपने दोस्तों के साथ प्रेम और सहयोग से रहिए। जो व्यक्ति अपने चरित्र से महान होता है, वही सच्चे अर्थों में सफल कहलाता है।

सातवाँ विचार — राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका समझिए

मेरे प्रिय साथियों, आप केवल विद्यार्थी नहीं हैं, आप इस देश का भविष्य हैं। आने वाले कल में यही देश आपके हाथों में होगा। डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक, सैनिक — चाहे आप कोई भी क्षेत्र चुनें, अपने काम को पूरी ईमानदारी और समर्पण से कीजिए। जब आप अपने सपनों को पूरा करेंगे, तभी आप अपने परिवार, समाज और देश का नाम रोशन कर पाएँगे।

स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था — "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।" यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन जीने का मंत्र है। हमें अपने अंदर की उस चिंगारी को पहचानना है, जो हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

अंत में — एक संकल्प लीजिए

  • आप अपने सपनों का पीछा करेंगे, चाहे राह में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ।

  • आप असफलता से घबराएँगे नहीं, बल्कि उससे सीखकर आगे बढ़ेंगे।

  • आप मेहनत और अनुशासन को अपनी आदत बनाएँगे।

  • आप अपने समय का सम्मान करेंगे और उसे व्यर्थ नहीं गंवाएँगे।

  • आप खुद पर विश्वास रखेंगे और अपनी तुलना केवल कल के खुद से करेंगे।

  • आप एक अच्छा इंसान बनने की कोशिश करेंगे, न कि केवल एक सफल इंसान।

याद रखिए — मंज़िलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है। पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। आप सब में वह क्षमता है कि आप जो चाहें, वह हासिल कर सकते हैं। बस ज़रूरत है खुद पर विश्वास रखने की, मेहनत करते रहने की, और कभी हार न मानने की।

आज से, अभी से, इसी पल से अपने सपनों की ओर पहला कदम बढ़ाइए। क्योंकि जो आज शुरुआत करता है, वही कल इतिहास रचता है।

जय हिंद! धन्यवाद!

आप सभी उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ें, यही शुभकामनाएँ।

 जय हिंद! जय भारत!

धन्यवाद

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार 

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Prayas - May 2026

   

Year - 7                                        Month - May 2026                                  Issue - 77

मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,

जीवन एक सुंदर यात्रा है। इस यात्रा में हर दिन हमें कुछ नया सीखने, समझने और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। विद्यार्थी जीवन इस पूरी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, क्योंकि यही वह समय है जब हम अपने भविष्य की नींव रखते हैं। आज जो आदतें, विचार और मेहनत आप अपनाते हैं, वही आने वाले वर्षों में आपकी पहचान बनते हैं।

आज मैं आपसे केवल पढ़ाई की बात नहीं करूँगा, बल्कि उस सोच की बात करूँगा जो किसी साधारण विद्यार्थी को असाधारण बना देती है।

बहुत बार हम अपने जीवन में कठिनाइयों से घिर जाते हैं। कभी परीक्षा का डर, कभी कम अंक आने का दुख, कभी दूसरों से तुलना, तो कभी यह चिंता कि “क्या मैं सफल हो पाऊँगा?” लेकिन याद रखिए — सफलता केवल तेज दिमाग वालों को नहीं मिलती, बल्कि उन लोगों को मिलती है जो हार मानना नहीं जानते।

एक छोटी-सी चींटी को देखिए। वह बार-बार गिरती है, लेकिन रुकती नहीं। वह हर बार उठती है और फिर कोशिश करती है। अंत में वही चींटी अपने लक्ष्य तक पहुँच जाती है। प्रकृति हमें हर दिन यह सिखाती है कि लगातार प्रयास करने वाला व्यक्ति कभी असफल नहीं होता।

विद्यार्थियों, आपके अंदर अपार शक्ति है। कभी भी खुद को कमजोर मत समझिए। दुनिया का हर महान व्यक्ति कभी न कभी एक साधारण विद्यार्थी ही था।
A. P. J. Abdul Kalam बचपन में अखबार बाँटते थे, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को छोटा होने नहीं दिया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और आगे चलकर भारत के “मिसाइल मैन” बने।
Swami Vivekananda ने कहा था — “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन बदल देने वाला मंत्र है।

आज का समय प्रतियोगिता का समय है। हर जगह प्रतिस्पर्धा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप डर जाएँ। तुलना करने से आत्मविश्वास कम होता है। हर विद्यार्थी की अपनी अलग क्षमता होती है। कोई पढ़ाई में अच्छा है, कोई खेल में, कोई संगीत में, कोई कला में। इसलिए कभी भी खुद को दूसरों से कम मत समझिए।

याद रखिए, सूरज और चाँद दोनों चमकते हैं, लेकिन अपने-अपने समय पर। उसी प्रकार आपकी सफलता भी सही समय पर अवश्य आएगी।

कई विद्यार्थी सोचते हैं कि केवल अच्छे अंक ही सफलता का प्रमाण हैं। अंक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जीवन में चरित्र, अनुशासन और व्यवहार उससे भी अधिक महत्वपूर्ण हैं। यदि आपके अंदर ईमानदारी, मेहनत और दूसरों के प्रति सम्मान है, तो आप जीवन में बहुत आगे जाएँगे।

अनुशासन सफलता की पहली सीढ़ी है। यदि आप प्रतिदिन समय पर उठते हैं, नियमित पढ़ाई करते हैं, अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर रहते हैं, तो धीरे-धीरे आपकी आदतें आपको सफलता की ओर ले जाएँगी। छोटी-छोटी अच्छी आदतें ही बड़े परिणाम देती हैं।

मोबाइल और सोशल मीडिया आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। तकनीक बुरी नहीं है, लेकिन उसका गलत उपयोग हमारे समय और ध्यान को नष्ट कर देता है। सोचिए, यदि आप रोज़ दो घंटे बिना उद्देश्य मोबाइल चलाते हैं, तो एक वर्ष में कितने घंटे व्यर्थ चले जाते हैं! वही समय यदि आप किसी नई चीज़ को सीखने में लगाएँ, तो आप अपने जीवन को पूरी तरह बदल सकते हैं।

विद्यार्थियों, समय सबसे मूल्यवान धन है। खोया हुआ पैसा वापस आ सकता है, लेकिन खोया हुआ समय कभी वापस नहीं आता। इसलिए हर दिन का सही उपयोग कीजिए।
एक छोटा-सा नियम अपनाइए —
“आज का काम आज ही।”
जब आप काम को टालना बंद कर देंगे, तब सफलता आपके और करीब आने लगेगी।

असफलता से डरिए मत। असफलता कोई अंत नहीं है, बल्कि सीखने का अवसर है। यदि आप कभी परीक्षा में कम अंक ले आएँ, तो निराश मत होइए। यह केवल एक परिणाम है, आपकी पूरी पहचान नहीं।
Thomas Edison ने बल्ब बनाने से पहले हजारों बार प्रयास किया। जब उनसे पूछा गया कि वे हजार बार असफल हुए, तो उन्होंने कहा —
“मैं असफल नहीं हुआ, मैंने केवल हजार ऐसे तरीके खोजे जो काम नहीं करते।”

यह सोच ही महान लोगों को महान बनाती है।

जीवन में लक्ष्य होना बहुत आवश्यक है। जिस विद्यार्थी का कोई लक्ष्य नहीं होता, वह बिना दिशा के चलती नाव की तरह होता है। इसलिए अपने जीवन का एक उद्देश्य तय कीजिए। चाहे आप डॉक्टर बनना चाहते हों, शिक्षक, इंजीनियर, वैज्ञानिक, कलाकार या अधिकारी — अपने सपनों को स्पष्ट रखिए और उन्हें पाने के लिए पूरी मेहनत कीजिए।

लेकिन केवल सपने देखने से कुछ नहीं होता। सपनों को सच करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। रातों की नींद छोड़नी पड़ती है। आराम छोड़ना पड़ता है।
जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब सफल लोग अपने सपनों के लिए काम कर रहे होते हैं।

याद रखिए —
“मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे।”

आपके माता-पिता और शिक्षक आपके जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं। माता-पिता आपके लिए दिन-रात मेहनत करते हैं ताकि आपको बेहतर भविष्य मिल सके। उनके त्याग और प्रेम का सम्मान कीजिए। अपने शिक्षकों का आदर कीजिए, क्योंकि वे केवल किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी दिखाते हैं।

सच्ची सफलता वही है जिसमें इंसान अच्छा व्यक्ति भी बने। यदि आप बड़े होकर केवल अमीर बन गए, लेकिन आपके अंदर दया, सम्मान और मानवता नहीं रही, तो वह सफलता अधूरी है। इसलिए हमेशा विनम्र रहिए। दूसरों की सहायता कीजिए। किसी का मज़ाक मत उड़ाइए। दूसरों को गिराकर नहीं, बल्कि साथ लेकर आगे बढ़िए।

स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितनी पढ़ाई। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है। नियमित व्यायाम कीजिए, अच्छा भोजन खाइए और पर्याप्त नींद लीजिए। यदि शरीर और मन स्वस्थ होंगे, तभी आप पूरी ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ पाएँगे।

कभी-कभी जीवन में अकेलापन, तनाव या निराशा महसूस होती है। ऐसे समय में खुद को कमजोर मत समझिए। अपने माता-पिता, मित्रों या शिक्षकों से बात कीजिए। याद रखिए, हर कठिन समय गुजर जाता है। अंधेरी रात के बाद सुबह अवश्य आती है।

अपने अंदर सकारात्मक सोच विकसित कीजिए। हर दिन खुद से कहिए —
“मैं कर सकता हूँ।”
“मैं सफल बनूँगा।”
“मैं हार नहीं मानूँगा।”

यह छोटे-छोटे वाक्य आपके आत्मविश्वास को मजबूत बनाते हैं।

प्रिय विद्यार्थियों,

आप केवल अपने परिवार की आशा नहीं हैं, बल्कि देश का भविष्य भी हैं। आने वाला भारत आपके विचारों, आपके ज्ञान और आपके चरित्र से बनेगा। इसलिए अपने जीवन को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए भी उपयोगी बनाइए।

जब भी थक जाएँ, अपने सपनों को याद कीजिए। जब भी डर लगे, अपनी मेहनत को याद कीजिए। और जब भी हार मानने का मन करे, उन लोगों को याद कीजिए जिन्हें आप पर विश्वास है।

आपके अंदर वह शक्ति है जो पर्वतों को भी झुका सकती है। बस जरूरत है खुद पर विश्वास रखने की।

अंत में मैं आपसे केवल इतना कहना चाहता हूँ —

  • बड़े सपने देखो।

  • मेहनत से कभी मत भागो।

  • समय का सम्मान करो।

  • असफलता से मत डरो।

  • अपने माता-पिता और शिक्षकों का आदर करो।

  • और सबसे महत्वपूर्ण — कभी भी खुद पर विश्वास खो मत देना।

एक दिन ऐसा अवश्य आएगा जब आपकी मेहनत रंग लाएगी, आपके माता-पिता गर्व से मुस्कुराएँगे और दुनिया आपकी सफलता की कहानी सुनेगी।

याद रखिए —

“सफलता की राह आसान नहीं होती, लेकिन जो लोग हिम्मत और मेहनत के साथ चलते हैं, मंज़िल उन्हीं के कदम चूमती है।”

आप सभी उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ें, यही शुभकामनाएँ।

 जय हिंद! जय भारत!

धन्यवाद

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा ।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार 

Welcome

 

Welcome to the new Academic Session in the school

PM SHRI Kendriya Vidyalaya Janakpuri, Delhi Region

The new academic session 2026-27 at Kendriya Vidyalaya has officially begun with great enthusiasm. Schools across the network are welcoming students back with special ceremonies, including traditional tika welcomes for some.
Key Updates for Session 2026-27
  • Admissions: Online registration for Class 1 and Balvatika (Nursery/LKG/UKG) remains a top priority, with the first provisional admission lists typically expected in early April.
  • Infrastructure: Many campuses are operating as PM SHRI Schools, focusing on "future-ready" education with smart classrooms and modern technology.
  • Activities: Students can look forward to a diverse range of activities, including OlympiadsArt & Craft exhibitions, and Fun Days held every Saturday.

prayas - April 2026 Issue - 76

   

Year - 7                                        Month - April 2026                                  Issue - 76

मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,

अपने भविष्य के निर्माता आप स्वयं हैं

हर सुबह जब आप स्कूल की दहलीज पर कदम रखते हैं, तो आप केवल ईंट-पत्थर की एक इमारत में नहीं जा रहे होते। आप अपने 'भविष्य' की प्रयोगशाला में प्रवेश कर रहे होते हैं। वे डेस्क, ब्लैकबोर्ड और गलियारों का शोर—ये सब वो कच्चा माल हैं जिनसे आप उस इंसान का निर्माण करेंगे जो आप कल बनने वाले हैं।

1. "अभी नहीं" की शक्ति

कक्षा 6 और उसके आगे के सफर में, आपको ऐसे विषय मिलेंगे जो किसी ऊँचे पहाड़ की तरह कठिन लगेंगे। चाहे वह गणित का कोई उलझा हुआ सवाल हो या इतिहास की कोई चुनौती, सफलता का रहस्य एक सरल वाक्य में छिपा है: "मुझे यह अभी नहीं पता है—पर मैं सीख जाऊँगा।"

बुद्धि कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो जन्म से स्थिर हो; यह एक मांसपेशी की तरह है। हर बार जब आप किसी कठिन विषय से जूझते हैं और हार मानने से इनकार कर देते हैं, तो वह मांसपेशी और मजबूत हो जाती है। असफलता कोई 'फुल स्टॉप' नहीं है; यह गहराई से समझने का एक नया रास्ता है। छोटी-मोटी गलतियों से घबराएं नहीं, क्योंकि गिरने के बाद ही हम आत्मविश्वास से चलना सीखते हैं।

2. जिज्ञासा को अपनी दिशा बनाएं

अपने आस-पास की दुनिया को उत्सुकता भरी नज़रों से देखें। इतिहास के सबसे सफल लोग—चाहे वे वैज्ञानिक हों या कलाकार—उन सब में एक बात समान थी: अटूट जिज्ञासा।

केवल परीक्षा पास करने के लिए न पढ़ें; यह समझने के लिए पढ़ें कि दुनिया कैसे काम करती है। तब तक "क्यों" पूछें जब तक आप किसी बात की जड़ तक न पहुँच जाएँ। जब आप विषयों को बोझ के बजाय दुनिया के रहस्यों को खोलने वाली 'चाबी' के रूप में देखना शुरू करेंगे, तो स्कूल जाना मजबूरी नहीं, बल्कि एक रोमांचक सफर बन जाएगा।

3. चरित्र की ताकत

माना कि ग्रेड्स और अंक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन आपका चरित्र ही आपकी लंबी सफलता को तय करेगा। ईमानदारी, दयालुता और जुझारूपन (Resilience) को किसी रिपोर्ट कार्ड पर नहीं मापा जा सकता, लेकिन यही गुण आपको एक सच्चा लीडर बनाते हैं।

  • ईमानदारी: सही काम करना, तब भी जब कोई आपको देख न रहा हो।

  • दयालुता: वह इंसान बनना जो नए छात्र का स्वागत करे या किसी कमजोर सहपाठी की मदद करे।

  • जुझारूपन: कम अंक आने पर निराश होकर बैठने के बजाय, फिर से उठना और नई रणनीति के साथ कोशिश करना।

4. आपकी संगति का असर

आपकी कक्षा में बैठने वाले छात्र केवल सहपाठी नहीं हैं; वे आपका सहारा हैं। अपने आप को ऐसे लोगों से घेरें जो आपको बेहतर बनने की चुनौती दें, जो आपकी जीत पर खुश हों और जब आप उदास हों तो आपका हौसला बढ़ाएं। एक प्रेरित क्लास मिलकर वह सब हासिल कर सकती है जो शायद एक अकेला छात्र न कर पाए।

5. भविष्य का क्षितिज

अभी शायद आपको लगे कि आपकी दुनिया स्कूल की दीवारों तक ही सीमित है। लेकिन याद रखें, आज आप जो आदतें बना रहे हैं—समय पर उठना, व्यवस्थित रहना और सीखते रहना—वही आपके भविष्य के करियर और परिवार की नींव रखेंगी।

आपके पास दुनिया बदलने की ताकत है। चाहे आप बीमारियों का इलाज करना चाहते हों, नए शहर बसाना चाहते हों या ऐसी कहानियाँ लिखना चाहते हों जो लोगों के दिल छू लें—इस सब की शुरुआत आज यहीं, कक्षा 7A में, आपके एक फैसले से होती है।

आपका भविष्य का स्वरूप आज ही आपके लिए तालियाँ बजा रहा है। उसे निराश मत होने देना।

 जय हिंद! जय भारत!

धन्यवाद

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा ।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार