💬Thought for the Day💬

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Prayas January 2026

   

Year - 7                            Month - January 2026                                   Issue - 73

प्रिय छात्रों, मेरे प्यारे बच्चों!

नमस्कार! आज मैं आपके सामने हूँ, न केवल एक शिक्षक के रूप में, बल्कि आपके मार्गदर्शक, आपके मित्र और आपके सपनों का साथी बनकर। यह स्कूल का वो पवित्र मंच है जहाँ हम सब मिलकर भविष्य की नींव रखते हैं। आप सब—ये चमकते हुए चेहरे, ये उत्सुक आँखें—भारत के भविष्य हो। आप वो बीज हो जो कल विशाल वटवृक्ष बनेंगे। लेकिन याद रखिए, कोई भी वृक्ष रातोंरात नहीं उगता। उसके लिए लगातार पानी, धूप और मेहनत चाहिए। आज मैं आपको प्रेरित करने आया हूँ—उस मेहनत की, उस जज्बे की कहानी सुनाने जो आपको शिखर पर पहुँचा सकती है।

सबसे पहले, सोचिए अपने सपनों के बारे में। क्या आपने कभी रात को जागकर सोचा है कि बड़ा होकर क्या बनना है? डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, खिलाड़ी या शायद कोई उद्यमी? सपने देखना आसान है, लेकिन उन्हें पूरा करना? वो तो एक जंग है! स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था, "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।" प्रिय बच्चों, आज का भारत बदल रहा है। हमारा देश चंद्रयान भेज रहा है, स्टार्टअप्स की बाढ़ आ रही है, AI और टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी बदल रही है। लेकिन ये सब तभी संभव होगा जब आप जैसे युवा आगे आएँगे। आपकी पीढ़ी वो है जो डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का चेहरा बनेगी। लेकिन इसके लिए क्या चाहिए? आत्मविश्वास! हिम्मत! और अटूट मेहनत!

याद रखिए, सफलता कोई जादू नहीं है। ये मेहनत की उपज है। थॉमस एडिसन ने बल्ब का आविष्कार करने से पहले 10,000 बार असफलता देखी। क्या उन्होंने हार मानी? नहीं! उन्होंने कहा, "मैं असफल नहीं हुआ, मैंने बस 10,000 तरीके ढूंढ लिए जो काम नहीं करते।" आप भी असफल होंगे—परीक्षा में कम नंबर आएँगे, स्पोर्ट्स में हारेंगे, दोस्तों से झगड़ा होगा। लेकिन हर असफलता एक सबक है। वो आपको मजबूत बनाती है। मैं आपको अपनी कहानी सुनाता हूँ। जब मैं आपकी उम्र का था, तो मुझे गणित मुश्किल लगता था। स्कूल में टीचर डाँटते, दोस्त हँसते। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। रोज़ दो घंटे प्रैक्टिस की। आज वही गणित मुझे आपको पढ़ाने की ताकत देता है। प्रिय छात्रों, आपकी जिंदगी में भी ऐसे मोड़ आएँगे। जब आएँ, तो पीछे मुड़कर मत देखना। आगे बढ़ो!

अब बात करते हैं आज की दुनिया की। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, इंटरनेट—ये सब आपके हाथ में हैं। लेकिन सावधान! ये दोधारी तलवार हैं। एक तरफ ये ज्ञान का खजाना हैं—आप यूट्यूब पर लेक्चर देख सकते हो, ओला क्लास या फिजिक्स वाले पर कोर्स कर सकते हो। दूसरी तरफ, ये समय चुरा लेते हैं। रील्स देखते-देखते घंटे निकल जाते हैं। प्रिय बच्चों, समय अमूल्य है। वो कभी वापस नहीं आता। अलbert आइंस्टीन ने कहा था, "समय ही वो सिक्का है जो जीवन भर खर्च करते रहते हैं।" अपना समय बर्बाद मत करो। रोज़ एक घंटा पढ़ाई के लिए निकालो, एक घंटा खेल के लिए, और बाकी परिवार के साथ। डिजिटल दुनिया में डेटा प्राइवेसी का ध्यान रखो। साइबर बुलिंग से बचो। AI का इस्तेमाल करो, लेकिन उसकी नैतिकता समझो। कलाम सर ने कहा था, "सपने वो नहीं जो आप सोते हुए देखते हो, सपने वो हैं जो आपको सोने न दें।"

शिक्षा के महत्व को कभी मत भूलना। भारत में NEP 2020 आया है, जो आपको नई राह दिखाता है। ये कहता है—रट्टा मारो मत, समझो। क्रिटिकल थिंकिंग सीखो, प्रॉब्लम सॉल्विंग करो। स्कूल सिर्फ किताबें नहीं, जीवन का स्कूल है। यहाँ आप अनुशासन सीखते हो, टीमवर्क सीखते हो, नेतृत्व सीखते हो। याद रखो, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम छोटे से द्वीप से निकले, मिसाइल मैन बने, राष्ट्रपति बने। उनका राज़? पढ़ाई और देशभक्ति। उन्होंने कहा, "अगर आप भारत को विकसित राष्ट्र बनाना चाहते हो, तो सपने देखो, मेहनत करो।" आप भी वैसा ही करो। हर सुबह उठो, लक्ष्य याद करो, और दिन शुरू करो।

अब चुनौतियों की बात। जीवन में बाधाएँ आएँगी। गरीबी, परिवार की जिम्मेदारियाँ, स्वास्थ्य समस्याएँ। लेकिन याद रखो, हर समस्या का समाधान है। महात्मा गांधी ने ब्रिटिश साम्राज्य को हराया बिना हथियार के। उनका हथियार था सत्य और अहिंसा। आपकी ताकत है शिक्षा और इच्छाशक्ति। अगर घर में पैसे की तंगी है, तो स्कॉलरशिप लो। सरकारी ऐप्स जैसे DIKSHA इस्तेमाल करो। अगर बीमारी है, तो हिम्मत रखो। हॉकी के जादूगर धनंजय को जल्दी ही पता चल गया कि उनके एक पैर में समस्या है, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। ओलंपिक मेडल जीता। आप भी ऐसा कर सकते हो!

परिवार और दोस्तों का साथ लो। माता-पिता वो पहाड़ हैं जो आपको सहारा देते हैं। उन्हें निराश मत करो। दोस्त चुनो जो आपको ऊपर उठाएँ, नीचे न खींचें। स्कूल में एक्स्ट्राकरिकुलर एक्टिविटीज़ जॉइन करो—डिबेट, डांस, स्पोर्ट्स। ये आपको कॉन्फिडेंस देंगे। और सबसे महत्वपूर्ण, स्वास्थ्य का ध्यान रखो। रोज़ व्यायाम करो, अच्छा खाओ, 8 घंटे सोओ। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क बसता है।

प्रिय छात्रों, भारत का इतिहास गवाह है। चाणक्य ने चंद्रगुप्त को सम्राट बनाया। रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से लड़ी। आज भूपेन हाजारीका, सुंदर पिचाई जैसे लोग दुनिया में नाम कमा रहे हैं। आप अगले सुंदर पिचाई हो सकते हो! लेकिन इसके लिए आज से शुरुआत करो। एक छोटा लक्ष्य बनाओ—आज 10 पेज पढ़ लूँगा। कल 20। धीरे-धीरे पहाड़ चढ़ोगे।

मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ। एक गाँव का लड़का था, जिसका नाम था दशरथ मांझी। पहाड़ के कारण गाँव वालों को अस्पताल जाने में मुश्किल होती। उसकी पत्नी की मौत हो गई। फिर उसने हथौड़े से पहाड़ काटना शुरू किया। 22 साल लगे, लेकिन रास्ता बन गया। आज 'माउंटेन मैन' कहलाते हैं। क्या आपमें वो जज्बा है? हाँ न? तो आज वादा करो—मैं मेहनत करूँगा, हार नहीं मानूँगा!

आज का युग डिजास्टर मैनेजमेंट और सस्टेनेबिलिटी का है। जलवायु परिवर्तन, बाढ़, भूकंप—ये चुनौतियाँ हैं। लेकिन आप इंजीनियर बनकर सेफ बिल्डिंग्स डिजाइन कर सकते हो, साइंटिस्ट बनकर क्लाइमेट सॉल्यूशन ढूंढ सकते हो। डेटा प्राइवेसी सीखो, क्योंकि कल आपका डेटा ही आपकी पहचान होगा। AI एथिक्स समझो, ताकि टेक्नोलॉजी मानवता की सेवा करे।

अंत में, प्रिय बच्चों, ये याद रखो—आप अनमोल हो। भगवान ने आपको ये जन्म दिया है कुछ बड़ा करने के लिए। जियो गरिमा से, पढ़ो लगन से, सपने पूरे करो। राष्ट्र के लिए जीयो।

 जय हिंद! जय भारत!

धन्यवाद

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा ।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार