💬Thought for the Day💬

"🍃🌾🌾 "Your competitors can copy your Work, Style & Procedure. But No one can copy your Passion, Sincerity & Honesty. If you hold on to them firmly, The world is yours..!! Follow your Principles." 🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃

Prayas - February 2026

   

Year - 7                            Month - February 2026                                   Issue - 74

मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,

आप सभी के ऊर्जावान चेहरों को देखकर मुझे न केवल गर्व हो रहा है, बल्कि भारत के एक उज्ज्वल भविष्य की झलक भी मिल रही है। स्कूल का यह दौर आपके जीवन का वह पड़ाव है जहाँ आप केवल विषय नहीं पढ़ते, बल्कि अपने चरित्र का निर्माण करते हैं।


1. सपनों की अहमियत: उड़ान की शुरुआत

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था, "सपने वो नहीं होते जो आप नींद में देखते हैं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते।" मेरे दोस्तों, स्कूल की इन दीवारों के बीच बैठकर कभी यह मत सोचना कि आप छोटे हैं या आपके सपने बहुत बड़े हैं। इतिहास गवाह है कि दुनिया के हर बड़े बदलाव की शुरुआत एक छोटे से कमरे में देखे गए एक बड़े सपने से हुई थी। आपके सपने आपकी पहचान हैं। अगर आप डॉक्टर, इंजीनियर, कलाकार, खिलाड़ी या एक उद्यमी बनना चाहते हैं, तो आज से ही उस सपने को जीना शुरू करें।

2. विफलता: सफलता की पहली सीढ़ी

अक्सर हम परीक्षा के अंकों (Marks) को अपनी काबिलियत का पैमाना मान लेते हैं। लेकिन याद रखना, एक कागज का टुकड़ा आपका भविष्य तय नहीं कर सकता। विफलता से डरो मत। विफलता का मतलब हारना नहीं होता, बल्कि इसका मतलब है कि आपको एक और मौका मिला है—बेहतर तरीके से शुरुआत करने का। थॉमस एडिसन जब बल्ब बना रहे थे, तो वे हजारों बार फेल हुए। उन्होंने क्या कहा? उन्होंने कहा, "मैं फेल नहीं हुआ, मैंने बस 10,000 ऐसे तरीके खोज लिए हैं जो काम नहीं करते।"

सीख: अगर आप गिरते हैं, तो यह मायने नहीं रखता। मायने यह रखता है कि क्या आप दोबारा उठने का साहस रखते हैं?

3. अनुशासन और कड़ी मेहनत का जादू

प्रतिभा (Talent) आपको भगवान से मिलती है, लेकिन कौशल (Skill) केवल घंटों की कड़ी मेहनत और अनुशासन से आता है।

अनुशासन का मतलब खुद को कष्ट देना नहीं है, बल्कि इसका मतलब है—उस चीज़ को चुनना जिसे आप सबसे ज्यादा चाहते हैं, उस चीज़ के ऊपर जिसे आप अभी चाहते हैं। * शायद आप अभी सोना चाहते हैं, लेकिन आपका सपना पढ़ना है।

  • शायद आप अभी सोशल मीडिया चलाना चाहते हैं, लेकिन आपकी मंजिल अभ्यास करना है।

यही छोटे-छोटे चुनाव आपको भीड़ से अलग खड़ा करेंगे। याद रखें, "पसीने की स्याही से जो लिखते हैं अपने इरादों को, उनके मुकद्दर के पन्ने कभी कोरे नहीं हुआ करते।"

4. सोशल मीडिया और ध्यान (Focus) की चुनौती

आज के दौर में आपके पास ज्ञान का सागर (Internet) तो है, लेकिन साथ ही भटकाव (Distraction) के हजारों रास्ते भी हैं। रील और शॉर्ट्स की दुनिया में अपना कीमती समय बर्बाद न करें। यह समय आपके "Skill Set" को बनाने का है, न कि दूसरों की जिंदगी को स्क्रीन पर देखने का।

अपने ध्यान को एक लेजर की तरह तेज करें। जब आप पढ़ें, तो केवल पढ़ें। जब आप खेलें, तो केवल खेलें।


5. चरित्र और संस्कार: एक अच्छे इंसान बनें

शिक्षा का असली उद्देश्य केवल एक अच्छी नौकरी पाना नहीं है। शिक्षा का असली उद्देश्य आपको एक 'बेहतर इंसान' बनाना है।

  • अपने शिक्षकों का सम्मान करें, क्योंकि वे आपके जीवन के शिल्पकार हैं।

  • अपने माता-पिता के त्याग को समझें। उनकी आंखों में अपने लिए एक चमक देखें, बोझ नहीं।

  • अपने सहपाठियों की मदद करें। प्रतिस्पर्धा (Competition) खुद से रखें, दूसरों से ईर्ष्या (Jealousy) नहीं।

6. समय की कीमत

समय वह धन है जिसे आप कभी दोबारा नहीं कमा सकते। जो बीत गया वो कल था, जो आएगा वो भविष्य है, लेकिन जो आपके हाथ में है, वो 'आज' है।

हर सुबह जब आप उठें, तो खुद से पूछें—"आज मैं ऐसा क्या करूँगा जो मुझे मेरे सपने के एक कदम और करीब ले जाए?"

7. परीक्षा: एक उत्सव, न कि डर

जैसे ही परीक्षा की तारीखें नज़दीक आती हैं, घर का माहौल किसी युद्ध जैसा हो जाता है। "कितना पढ़ा?", "सिलेबस पूरा हुआ या नहीं?"—ये सवाल आपको डराने लगते हैं। लेकिन याद रखिए, परीक्षा आपकी याददाश्त का टेस्ट हो सकती है, आपके व्यक्तित्व का नहीं।

  • तनाव क्यों होता है? तनाव तब होता है जब हम परिणाम (Result) के बारे में सोचते हैं। हम डरते हैं कि अगर कम नंबर आए तो लोग क्या कहेंगे।

  • समाधान: आप केवल अपनी तैयारी पर ध्यान दें। यदि आपने अपना शत-प्रतिशत (100%) दिया है, तो परिणाम जो भी हो, आपको पछतावा नहीं होगा। परीक्षा को एक 'बौद्धिक चुनौती' की तरह लें, न कि जीवन-मरण का प्रश्न।

याद रखें: एक फेलियर आपको यह नहीं बताता कि आप कमज़ोर हैं, वह बस यह बताता है कि आपकी रणनीति में सुधार की ज़रूरत है।

8. करियर का चुनाव: भीड़ का हिस्सा न बनें

स्कूल खत्म होने के बाद सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—"अब आगे क्या?"। अक्सर छात्र वही रास्ता चुनते हैं जिस पर उनके दोस्त जा रहे हैं या जिस पर समाज का दबाव है।

करियर चुनते समय इन तीन बातों (IKIGAI का एक सरल रूप) पर गौर करें:

  1. आपकी रुचि (Passion): वह क्या है जिसे करते समय आप समय भूल जाते हैं?

  2. आपकी क्षमता (Skill): आप किस काम में स्वाभाविक रूप से अच्छे हैं?

  3. भविष्य की जरूरत: क्या उस क्षेत्र में आगे बढ़ने की संभावनाएं हैं?

अगर आप एक बेहतरीन चित्रकार बन सकते हैं, तो एक औसत इंजीनियर बनकर आप कभी खुश नहीं रह पाएंगे। दुनिया को केवल डॉक्टरों और इंजीनियरों की ही नहीं, बल्कि लेखकों, विचारकों, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों और अच्छे राजनेताओं की भी ज़रूरत है। अपनी 'यूनिकनेस' (Uniqueness) को पहचानें।


9. मानसिक स्वास्थ्य: शांत मन की शक्ति

छात्र जीवन में अक्सर हम 'मानसिक सेहत' को भूल जाते हैं। तनाव और चिंता में डूबा हुआ दिमाग कभी भी अच्छी तरह से सीख नहीं सकता।

  • ब्रेक लें: लगातार घंटों पढ़ने के बजाय छोटे-छोटे ब्रेक लें।

  • नींद से समझौता न करें: एक थका हुआ दिमाग जानकारी को संचित (Store) नहीं कर सकता। 7-8 घंटे की नींद आपकी एकाग्रता को बढ़ाती है।

  • बात करें: अगर आप परेशान हैं, तो अपने शिक्षकों या माता-पिता से बात करें। अपनी चिंताओं को अंदर दबाकर न रखें।

10. हार को स्वीकार करना सीखें

आज की दुनिया बहुत प्रतिस्पर्धी (Competitive) है। हर कोई 'नंबर 1' आना चाहता है। लेकिन असल सफलता इस बात में नहीं है कि आप कभी न गिरें, बल्कि इसमें है कि गिरने के बाद आप कितनी जल्दी खड़े होते हैं। क्रिकेट के मैदान पर भी हर गेंद पर छक्का नहीं लगता, लेकिन एक अच्छा खिलाड़ी वही है जो अगली गेंद का इंतज़ार पूरे आत्मविश्वास के साथ करता है। जीवन भी वैसा ही है। एक परीक्षा खराब हुई? कोई बात नहीं। एक एंट्रेंस एग्जाम नहीं निकला? रास्ता बदलो, मंज़िल नहीं।

मेरे युवा साथियों, आप इस देश की रीढ़ की हड्डी हैं। आपके भीतर असीम ऊर्जा भरी हुई है। दुनिया आपको बताएगी कि आप यह नहीं कर सकते, परिस्थितियां आपको रोकेंगी, लेकिन आपको रुकना नहीं है।

याद रखना: "मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।"

उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। पूरा स्कूल, आपके माता-पिता और यह देश आपकी सफलता का इंतज़ार कर रहा है। जाओ और अपनी कहानी खुद लिखो!

 जय हिंद! जय भारत!

धन्यवाद

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा ।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार 

Prayas January 2026

   

Year - 7                            Month - January 2026                                   Issue - 73

प्रिय छात्रों, मेरे प्यारे बच्चों!

नमस्कार! आज मैं आपके सामने हूँ, न केवल एक शिक्षक के रूप में, बल्कि आपके मार्गदर्शक, आपके मित्र और आपके सपनों का साथी बनकर। यह स्कूल का वो पवित्र मंच है जहाँ हम सब मिलकर भविष्य की नींव रखते हैं। आप सब—ये चमकते हुए चेहरे, ये उत्सुक आँखें—भारत के भविष्य हो। आप वो बीज हो जो कल विशाल वटवृक्ष बनेंगे। लेकिन याद रखिए, कोई भी वृक्ष रातोंरात नहीं उगता। उसके लिए लगातार पानी, धूप और मेहनत चाहिए। आज मैं आपको प्रेरित करने आया हूँ—उस मेहनत की, उस जज्बे की कहानी सुनाने जो आपको शिखर पर पहुँचा सकती है।

सबसे पहले, सोचिए अपने सपनों के बारे में। क्या आपने कभी रात को जागकर सोचा है कि बड़ा होकर क्या बनना है? डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, खिलाड़ी या शायद कोई उद्यमी? सपने देखना आसान है, लेकिन उन्हें पूरा करना? वो तो एक जंग है! स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था, "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।" प्रिय बच्चों, आज का भारत बदल रहा है। हमारा देश चंद्रयान भेज रहा है, स्टार्टअप्स की बाढ़ आ रही है, AI और टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी बदल रही है। लेकिन ये सब तभी संभव होगा जब आप जैसे युवा आगे आएँगे। आपकी पीढ़ी वो है जो डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का चेहरा बनेगी। लेकिन इसके लिए क्या चाहिए? आत्मविश्वास! हिम्मत! और अटूट मेहनत!

याद रखिए, सफलता कोई जादू नहीं है। ये मेहनत की उपज है। थॉमस एडिसन ने बल्ब का आविष्कार करने से पहले 10,000 बार असफलता देखी। क्या उन्होंने हार मानी? नहीं! उन्होंने कहा, "मैं असफल नहीं हुआ, मैंने बस 10,000 तरीके ढूंढ लिए जो काम नहीं करते।" आप भी असफल होंगे—परीक्षा में कम नंबर आएँगे, स्पोर्ट्स में हारेंगे, दोस्तों से झगड़ा होगा। लेकिन हर असफलता एक सबक है। वो आपको मजबूत बनाती है। मैं आपको अपनी कहानी सुनाता हूँ। जब मैं आपकी उम्र का था, तो मुझे गणित मुश्किल लगता था। स्कूल में टीचर डाँटते, दोस्त हँसते। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। रोज़ दो घंटे प्रैक्टिस की। आज वही गणित मुझे आपको पढ़ाने की ताकत देता है। प्रिय छात्रों, आपकी जिंदगी में भी ऐसे मोड़ आएँगे। जब आएँ, तो पीछे मुड़कर मत देखना। आगे बढ़ो!

अब बात करते हैं आज की दुनिया की। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, इंटरनेट—ये सब आपके हाथ में हैं। लेकिन सावधान! ये दोधारी तलवार हैं। एक तरफ ये ज्ञान का खजाना हैं—आप यूट्यूब पर लेक्चर देख सकते हो, ओला क्लास या फिजिक्स वाले पर कोर्स कर सकते हो। दूसरी तरफ, ये समय चुरा लेते हैं। रील्स देखते-देखते घंटे निकल जाते हैं। प्रिय बच्चों, समय अमूल्य है। वो कभी वापस नहीं आता। अलbert आइंस्टीन ने कहा था, "समय ही वो सिक्का है जो जीवन भर खर्च करते रहते हैं।" अपना समय बर्बाद मत करो। रोज़ एक घंटा पढ़ाई के लिए निकालो, एक घंटा खेल के लिए, और बाकी परिवार के साथ। डिजिटल दुनिया में डेटा प्राइवेसी का ध्यान रखो। साइबर बुलिंग से बचो। AI का इस्तेमाल करो, लेकिन उसकी नैतिकता समझो। कलाम सर ने कहा था, "सपने वो नहीं जो आप सोते हुए देखते हो, सपने वो हैं जो आपको सोने न दें।"

शिक्षा के महत्व को कभी मत भूलना। भारत में NEP 2020 आया है, जो आपको नई राह दिखाता है। ये कहता है—रट्टा मारो मत, समझो। क्रिटिकल थिंकिंग सीखो, प्रॉब्लम सॉल्विंग करो। स्कूल सिर्फ किताबें नहीं, जीवन का स्कूल है। यहाँ आप अनुशासन सीखते हो, टीमवर्क सीखते हो, नेतृत्व सीखते हो। याद रखो, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम छोटे से द्वीप से निकले, मिसाइल मैन बने, राष्ट्रपति बने। उनका राज़? पढ़ाई और देशभक्ति। उन्होंने कहा, "अगर आप भारत को विकसित राष्ट्र बनाना चाहते हो, तो सपने देखो, मेहनत करो।" आप भी वैसा ही करो। हर सुबह उठो, लक्ष्य याद करो, और दिन शुरू करो।

अब चुनौतियों की बात। जीवन में बाधाएँ आएँगी। गरीबी, परिवार की जिम्मेदारियाँ, स्वास्थ्य समस्याएँ। लेकिन याद रखो, हर समस्या का समाधान है। महात्मा गांधी ने ब्रिटिश साम्राज्य को हराया बिना हथियार के। उनका हथियार था सत्य और अहिंसा। आपकी ताकत है शिक्षा और इच्छाशक्ति। अगर घर में पैसे की तंगी है, तो स्कॉलरशिप लो। सरकारी ऐप्स जैसे DIKSHA इस्तेमाल करो। अगर बीमारी है, तो हिम्मत रखो। हॉकी के जादूगर धनंजय को जल्दी ही पता चल गया कि उनके एक पैर में समस्या है, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। ओलंपिक मेडल जीता। आप भी ऐसा कर सकते हो!

परिवार और दोस्तों का साथ लो। माता-पिता वो पहाड़ हैं जो आपको सहारा देते हैं। उन्हें निराश मत करो। दोस्त चुनो जो आपको ऊपर उठाएँ, नीचे न खींचें। स्कूल में एक्स्ट्राकरिकुलर एक्टिविटीज़ जॉइन करो—डिबेट, डांस, स्पोर्ट्स। ये आपको कॉन्फिडेंस देंगे। और सबसे महत्वपूर्ण, स्वास्थ्य का ध्यान रखो। रोज़ व्यायाम करो, अच्छा खाओ, 8 घंटे सोओ। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क बसता है।

प्रिय छात्रों, भारत का इतिहास गवाह है। चाणक्य ने चंद्रगुप्त को सम्राट बनाया। रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से लड़ी। आज भूपेन हाजारीका, सुंदर पिचाई जैसे लोग दुनिया में नाम कमा रहे हैं। आप अगले सुंदर पिचाई हो सकते हो! लेकिन इसके लिए आज से शुरुआत करो। एक छोटा लक्ष्य बनाओ—आज 10 पेज पढ़ लूँगा। कल 20। धीरे-धीरे पहाड़ चढ़ोगे।

मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ। एक गाँव का लड़का था, जिसका नाम था दशरथ मांझी। पहाड़ के कारण गाँव वालों को अस्पताल जाने में मुश्किल होती। उसकी पत्नी की मौत हो गई। फिर उसने हथौड़े से पहाड़ काटना शुरू किया। 22 साल लगे, लेकिन रास्ता बन गया। आज 'माउंटेन मैन' कहलाते हैं। क्या आपमें वो जज्बा है? हाँ न? तो आज वादा करो—मैं मेहनत करूँगा, हार नहीं मानूँगा!

आज का युग डिजास्टर मैनेजमेंट और सस्टेनेबिलिटी का है। जलवायु परिवर्तन, बाढ़, भूकंप—ये चुनौतियाँ हैं। लेकिन आप इंजीनियर बनकर सेफ बिल्डिंग्स डिजाइन कर सकते हो, साइंटिस्ट बनकर क्लाइमेट सॉल्यूशन ढूंढ सकते हो। डेटा प्राइवेसी सीखो, क्योंकि कल आपका डेटा ही आपकी पहचान होगा। AI एथिक्स समझो, ताकि टेक्नोलॉजी मानवता की सेवा करे।

अंत में, प्रिय बच्चों, ये याद रखो—आप अनमोल हो। भगवान ने आपको ये जन्म दिया है कुछ बड़ा करने के लिए। जियो गरिमा से, पढ़ो लगन से, सपने पूरे करो। राष्ट्र के लिए जीयो।

 जय हिंद! जय भारत!

धन्यवाद

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा ।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार