💬Thought for the Day💬

"🍃🌾🌾 "Your competitors can copy your Work, Style & Procedure. But No one can copy your Passion, Sincerity & Honesty. If you hold on to them firmly, The world is yours..!! Follow your Principles." 🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃

Prayas - July 2026

   

Year - 7                                        Month - July 2026                                  Issue - 79

मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,

जैसे-जैसे परीक्षा के दिन नज़दीक आते हैं, हम सबके मन में कहीं न कहीं थोड़ी घबराहट, थोड़ा तनाव और थोड़ी बेचैनी होने लगती है। यह बिल्कुल स्वाभाविक है। लेकिन आज मैं आपसे यह कहना चाहता हूँ कि यह परीक्षा केवल कागज़ पर लिखे कुछ सवालों का जवाब देना नहीं है, बल्कि यह हमारी मेहनत, हमारे अनुशासन और हमारे आत्मविश्वास की एक परीक्षा है।

परीक्षा का असली अर्थ

सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि परीक्षा हमारे जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक पड़ाव है। यह हमें यह जानने का अवसर देती है कि हमने साल भर जो पढ़ा है, उसे हम कितना समझ पाए हैं। कई बार हम परीक्षा को लेकर इतने डर जाते हैं कि हम यह भूल जाते हैं कि परीक्षा हमारी क्षमता जानने का एक ज़रिया है, न कि हमारी पहचान तय करने वाला कोई अंतिम निर्णय। एक अच्छा या बुरा परिणाम हमें परिभाषित नहीं करता — हमारी मेहनत, हमारा चरित्र और हमारा दृष्टिकोण ही हमें परिभाषित करता है।

समय का सही प्रबंधन

मित्रों, सफलता की पहली सीढ़ी है समय का सही प्रबंधन। जब हम अपने दिन को सही ढंग से बाँटते हैं, तो हमें पढ़ाई का बोझ महसूस नहीं होता। रोज़ थोड़ा-थोड़ा पढ़ना, आखिरी रात में सब कुछ रटने की कोशिश करने से कहीं बेहतर है। एक समय-सारणी बनाइए, जिसमें हर विषय को उचित समय मिले, और उस सारणी का ईमानदारी से पालन कीजिए। साथ ही यह भी याद रखिए कि लगातार पढ़ते रहना ही समाधान नहीं है — बीच-बीच में छोटे विश्राम लेना, दिमाग को ताज़ा रखना भी उतना ही ज़रूरी है। एक थका हुआ मस्तिष्क उतनी अच्छी तरह याद नहीं रख पाता, जितना एक तरोताज़ा मस्तिष्क रख पाता है।

आत्मविश्वास ही असली ताकत है

हमारे मन में जो सबसे बड़ा शत्रु छिपा होता है, वह है — स्वयं पर संदेह। जब हम बार-बार यह सोचते हैं कि "मुझसे नहीं होगा," "मैं फेल हो जाऊँगा," "मेरी तैयारी अधूरी है," तो यही नकारात्मक विचार हमारी असली क्षमता को दबा देते हैं। हमें अपने आप पर विश्वास रखना सीखना होगा। याद रखिए, आपने पूरे साल जो मेहनत की है, वह व्यर्थ नहीं जा सकती। हर दिन जो आपने कक्षा में सीखा, हर नोट्स जो आपने बनाए, हर सवाल जो आपने हल किया — वह सब आपके भीतर संचित है। बस ज़रूरत है उस पर विश्वास करने की।

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को स्कूल में कमज़ोर विद्यार्थी समझा जाता था, परंतु उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आगे चलकर दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिकों में गिने गए। इसी तरह हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन भी हमें यही सिखाता है कि संघर्ष और मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने कहा था — "सपने वो नहीं जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।" यह पंक्ति हमें यह प्रेरणा देती है कि हमें अपने लक्ष्यों के प्रति इतना समर्पित होना चाहिए कि वे हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन जाएँ।

तनाव को कैसे संभालें

परीक्षा के दिनों में तनाव होना आम बात है, परंतु अत्यधिक तनाव हमारी सोचने-समझने की शक्ति को कमज़ोर कर देता है। इसलिए ज़रूरी है कि हम गहरी साँस लेने के अभ्यास करें, पर्याप्त नींद लें, और सकारात्मक सोच बनाए रखें। अपने माता-पिता और शिक्षकों से खुलकर बात कीजिए, अपनी चिंताएँ साझा कीजिए। याद रखिए, आप अकेले नहीं हैं — आपके परिवार, शिक्षक और मित्र हमेशा आपके साथ खड़े हैं। किसी भी सवाल में अटकने पर घबराने की बजाय, शांत मन से उसे समझने की कोशिश कीजिए।

साथ ही, अपनी तुलना दूसरों से मत कीजिए। हर विद्यार्थी की अपनी गति होती है, अपनी क्षमता होती है। जो एक विद्यार्थी एक घंटे में समझ लेता है, हो सकता है दूसरे को उसी बात को समझने में थोड़ा अधिक समय लगे — इसका यह अर्थ कदापि नहीं कि वह कमज़ोर है। अपनी प्रगति को स्वयं के कल के प्रयासों से मापिए, किसी और से नहीं।

अनुशासन और नियमितता

सफलता कोई चमत्कार नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास और अनुशासन का परिणाम होती है। जो विद्यार्थी नियमित रूप से पढ़ाई करते हैं, संशय होने पर तुरंत अपने शिक्षकों से पूछते हैं, और पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास करते हैं, वे परीक्षा के समय अधिक आत्मविश्वासी महसूस करते हैं। रिवीज़न को कभी हल्के में मत लीजिए। जो पढ़ा है उसे बार-बार दोहराना, उसे स्थायी रूप से याद रखने में मदद करता है। स्वयं परीक्षण (self-test) करना भी एक बहुत प्रभावी तरीका है — इससे हमें यह पता चलता है कि हमें किस विषय पर और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है।

संतुलित जीवनशैली

परीक्षा के दिनों में स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पढ़ाई करना। पौष्टिक भोजन कीजिए, पर्याप्त पानी पीजिए, और कुछ समय शारीरिक गतिविधियों के लिए भी निकालिए। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क वास करता है। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से थोड़ी दूरी बनाना भी इस समय बहुत लाभदायक सिद्ध होता है, क्योंकि यह हमारा ध्यान और समय दोनों छीन लेता है।

अंतिम संदेश

अंत में, मैं आप सभी से यही कहना चाहूँगा — परिणाम की चिंता करने की बजाय, अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित कीजिए। जो आपके हाथ में है, वह है ईमानदार मेहनत, नियमित अभ्यास और सकारात्मक सोच। परिणाम अपने आप अच्छा आएगा, क्योंकि जैसा प्रयास होगा, वैसा ही फल मिलेगा। असफलता से डरिए मत, क्योंकि असफलता भी हमें सिखाती है और हमें और मज़बूत बनाती है। हर परीक्षा हमें कुछ नया सिखाती है, चाहे परिणाम कुछ भी हो।

याद रखिए — आप में असीम क्षमता है। बस उस पर विश्वास कीजिए, मेहनत करते रहिए, और अपने सपनों की ओर दृढ़ता से बढ़ते रहिए। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी अपनी आने वाली परीक्षाओं में सफलता के नए शिखर छुएँगे।

धन्यवाद! जय हिन्द!

आप सभी उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ें, यही शुभकामनाएँ।

 जय हिंद! जय भारत!

धन्यवाद

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार 

June 2026

   

Year - 7                           Month - June 2026                              Issue - 78

मेरे प्यारे विद्यार्थियों और भविष्य के कर्णधारों,

क्या हम सब अपनी असली क्षमता को पहचानते हैं? क्या हमने कभी रुककर सोचा है कि हमारे भीतर कितनी बड़ी शक्ति छिपी हुई है? आज मैं आपसे कुछ ऐसी बातें साझा करना चाहता हूँ, जो शायद आपकी सोच को बदल दें, आपके अंदर के उस सोए हुए जज़्बे को जगा दें, जो हर सफलता की पहली सीढ़ी होता है।

पहला विचार — सपने देखना कोई अपराध नहीं है

हम अक्सर सुनते हैं कि "बड़े सपने मत देखो, हकीकत में जियो।" लेकिन मैं आपसे कहना चाहता हूँ — यह सोच बदलनी होगी। हर वह इंसान जिसने आज इतिहास रचा है, उसने पहले एक सपना देखा था। एक साधारण व्यक्ति जब अपने सपनों पर विश्वास करता है, तभी वह असाधारण बनता है।

सोचिए, अगर राइट बंधुओं ने आसमान में उड़ने का सपना न देखा होता, तो क्या आज हम हवाई जहाज़ में यात्रा कर पाते? अगर डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने एक साधारण मछुआरे के बेटे होते हुए भी बड़े सपने न देखे होते, तो क्या भारत का मिसाइल कार्यक्रम इतना सफल होता? सपने देखना कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए साथियों, आज से डरना छोड़िए और खुलकर सपने देखिए — बड़े, ऊँचे और साहसी सपने।

दूसरा विचार — असफलता, सफलता की सीढ़ी है

अक्सर हम असफलता से डरते हैं। परीक्षा में कम अंक आने पर, किसी प्रतियोगिता में हार जाने पर, या किसी काम में नाकाम होने पर हम खुद को कमज़ोर समझने लगते हैं। लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूँ — असफलता कोई अंत नहीं है, यह तो एक नई शुरुआत का संकेत है।

थॉमस एडिसन ने बल्ब बनाने में हज़ारों बार असफलता का सामना किया। जब किसी ने उनसे पूछा कि इतनी बार असफल होकर आपको कैसा लगता है, तो उन्होंने कहा — "मैं असफल नहीं हुआ, मैंने केवल हज़ार ऐसे तरीके खोजे जो काम नहीं करते।" यही सोच हमें अपनानी चाहिए। जब भी आप गिरें, याद रखिए कि गिरना बुरी बात नहीं है, बल्कि दोबारा न उठना बुरी बात है।

क्रिकेट के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को भी अपने करियर की शुरुआत में कई बार असफलता मिली, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज वे लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। तो साथियों, अगली बार जब आप असफल हों, तो निराश मत होइए — बल्कि उस असफलता से सीखिए और आगे बढ़िए।

तीसरा विचार — मेहनत का कोई विकल्प नहीं

हम अक्सर सफल लोगों की कहानियाँ सुनते हैं और सोचते हैं कि उन्हें यह सब आसानी से मिल गया। लेकिन सच्चाई यह है कि सफलता के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत, त्याग और अनुशासन छिपा होता है। कोई भी सफलता रातों-रात नहीं मिलती।

एक किसान जब बीज बोता है, तो वह तुरंत फल की उम्मीद नहीं करता। वह धैर्य रखता है, नियमित रूप से पानी देता है, देखभाल करता है, और समय आने पर उसे फल मिलता है। ठीक इसी तरह, हमें भी अपने लक्ष्यों के लिए धैर्य और निरंतर प्रयास की आवश्यकता है। स्कूल के ये वर्ष हमारे जीवन की नींव हैं। जो मेहनत हम आज करेंगे, वही कल हमारे भविष्य का निर्माण करेगी।

याद रखिए, प्रतिभा केवल एक शुरुआत है। असली सफलता उन्हीं को मिलती है, जो लगातार अभ्यास करते हैं, जो हार मानने के बजाय बार-बार कोशिश करते हैं। जैसा कि कहा जाता है — "मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे।"

चौथा विचार — समय का महत्व समझिए

दोस्तों, समय सबसे कीमती संपत्ति है, जो एक बार बीत जाने के बाद कभी वापस नहीं आती। पैसा खो जाए तो दोबारा कमाया जा सकता है, लेकिन बीता हुआ समय कभी वापस नहीं मिलता। इसलिए हमें अपने समय का सही उपयोग करना सीखना होगा।

आज के दौर में मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और तमाम तरह के मनोरंजन हमारा बहुमूल्य समय छीन रहे हैं। यह ज़रूरी नहीं कि हम इनसे पूरी तरह दूर हो जाएँ, लेकिन संतुलन बनाना बेहद आवश्यक है। अपने लक्ष्यों को प्राथमिकता दीजिए, एक समय-सारणी बनाइए और उसका पालन कीजिए। जो विद्यार्थी समय का सम्मान करना सीख जाता है, वह जीवन में कभी पीछे नहीं रहता।

पाँचवाँ विचार — खुद पर विश्वास रखिए

साथियों, दुनिया में सबसे बड़ी ताकत आत्मविश्वास है। जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करेंगे, तब तक कोई और भी आप पर विश्वास नहीं करेगा। बहुत बार हम दूसरों से अपनी तुलना करने लगते हैं और खुद को कमतर आँकने लगते हैं। लेकिन याद रखिए, हर इंसान अनोखा है। जिस तरह एक बीज को पेड़ बनने में समय लगता है, उसी तरह आपकी प्रतिभा को निखरने में भी समय लग सकता है।

अपनी तुलना दूसरों से मत कीजिए, बल्कि कल के अपने आप से कीजिए। खुद से पूछिए — "क्या मैं आज कल से बेहतर हूँ?" यह सवाल आपको हर दिन आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। अपनी कमजोरियों को स्वीकार कीजिए, लेकिन उन्हें अपनी पहचान मत बनने दीजिए। अपनी खूबियों पर ध्यान दीजिए और उन्हें निखारने में मेहनत कीजिए।

छठा विचार — अच्छे संस्कार और चरित्र सबसे बड़ी पूंजी है

दोस्तों, शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। असली शिक्षा वह है, जो हमें एक अच्छा इंसान बनाती है। आप कितने भी सफल क्यों न हो जाएँ, अगर आपके अंदर विनम्रता, ईमानदारी और दूसरों के प्रति सम्मान नहीं है, तो वह सफलता अधूरी है।

अपने माता-पिता का सम्मान कीजिए, जिन्होंने आपको यहाँ तक पहुँचाने के लिए दिन-रात मेहनत की है। अपने शिक्षकों का आदर कीजिए, जो आपके भविष्य को गढ़ने में लगे हुए हैं। अपने दोस्तों के साथ प्रेम और सहयोग से रहिए। जो व्यक्ति अपने चरित्र से महान होता है, वही सच्चे अर्थों में सफल कहलाता है।

सातवाँ विचार — राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका समझिए

मेरे प्रिय साथियों, आप केवल विद्यार्थी नहीं हैं, आप इस देश का भविष्य हैं। आने वाले कल में यही देश आपके हाथों में होगा। डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक, सैनिक — चाहे आप कोई भी क्षेत्र चुनें, अपने काम को पूरी ईमानदारी और समर्पण से कीजिए। जब आप अपने सपनों को पूरा करेंगे, तभी आप अपने परिवार, समाज और देश का नाम रोशन कर पाएँगे।

स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था — "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।" यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन जीने का मंत्र है। हमें अपने अंदर की उस चिंगारी को पहचानना है, जो हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

अंत में — एक संकल्प लीजिए

  • आप अपने सपनों का पीछा करेंगे, चाहे राह में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ।

  • आप असफलता से घबराएँगे नहीं, बल्कि उससे सीखकर आगे बढ़ेंगे।

  • आप मेहनत और अनुशासन को अपनी आदत बनाएँगे।

  • आप अपने समय का सम्मान करेंगे और उसे व्यर्थ नहीं गंवाएँगे।

  • आप खुद पर विश्वास रखेंगे और अपनी तुलना केवल कल के खुद से करेंगे।

  • आप एक अच्छा इंसान बनने की कोशिश करेंगे, न कि केवल एक सफल इंसान।

याद रखिए — मंज़िलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है। पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। आप सब में वह क्षमता है कि आप जो चाहें, वह हासिल कर सकते हैं। बस ज़रूरत है खुद पर विश्वास रखने की, मेहनत करते रहने की, और कभी हार न मानने की।

आज से, अभी से, इसी पल से अपने सपनों की ओर पहला कदम बढ़ाइए। क्योंकि जो आज शुरुआत करता है, वही कल इतिहास रचता है।

जय हिंद! धन्यवाद!

आप सभी उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ें, यही शुभकामनाएँ।

 जय हिंद! जय भारत!

धन्यवाद

अगले महीने कुछ और लेकर आपके सामने फिर आऊंगा।

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार