💬Thought for the Day💬

"🍃🌾🌾 "Your competitors can copy your Work, Style & Procedure. But No one can copy your Passion, Sincerity & Honesty. If you hold on to them firmly, The world is yours..!! Follow your Principles." 🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃

Prayas - April 2023

 

Prayas - April 2023

                                                      

Year - 3                         Month - April 2023                              Issue - 40

प्यारे बच्चों,

गत माह कुछ ज्यादा व्यस्तता के कारण आपके लिए कुछ नहीं लिख पाया मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप सभी लोग अच्छे होंगे I अब आप का नया सेशन शुरू हो चूका है और नए पुस्तकों के साथ पढ़ने का आनंद ले रहे होंगे I इसी क्रम में आज कुछ कसमें वादे भी करें कि कुछ नया करना है इस बार I इसी को लेकर आज का article आपके प्रसास के अंतर्गत -

1- आज नहीं कल से करूँगा 

आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों, हम इसी तरह अपने कामों को टालते रहते हैं। जो काम आज हो सकता है, उसे कल पर टाल देते हैं और कल आने पर परसों। इसी तरह समय बीतता जाता है और एक-एक दिन के साथ हमारे कामों का बोझ बढ़ता जाता है।

जैसे जैसे हमारे कामों का बोझ बढ़ता जाता है तो हम उन कामों को करना ही छोड़ देते हैं और ऐसे में कई बार हम अपने जरूरी काम भी नहीं कर पाते और फिर बाद में उसी का अफ़सोस करते हैं। अपने काम को टालते रहना या फिर हर काम में काम चोरी करना असफल लोगों की निशानी है। जो काम आप आज और अभी कर सकते हैं उसे कभी भी कल पर ना टालें।

अपने आलस को अपनी जिंदगी से दूर रख कर उस काम को आज ही निपटा लें। ‘डेविड कॉपरफील्ड’ किताब में चार्ल्स डिकेंस कहते हैं, ‘मेरी सलाह है कि जो काम आप आज कर सकते हैं, उसे कल पर ना छोड़े। टालमटोल का रवैया समय का सबसे बड़ा चोर है।’ 

2- बेवजह का डर क्यों 

एक बात से जुड़ी कई बातें होती हैं। उनमें कई आशंकाएं और संभावनाएं छिपी होती हैं। लेकिन उदासी के पलों में हमें केवल डर दिखाई देता है। हम अपने डर पर ज्यादा भरोसा करने लगते हैं। कई बार हमारा डर हमें भविष्य में होने वाले खतरों से बचाता भी है। पर, कई डर बेमतलब के होते हैं।

हम बेवजह एक बात से दूसरी बात को जोड़ते चले जाते हैं। मनोविज्ञानी कहते हैं, डर भी एक feeling है, एक रासायनिक प्रतिक्रिया है। मन में छुपा रहने वाला हर डर सही साबित नहीं होता। कोई Thought अगर आपको ज्यादा परेशान कर रहा है, तो उससे ध्यान हटाने की कोशिश करें।

किसी दूसरी चीज के बारे में सोचने की कोशिश करें। अपने well wishers से बात करें। उस समस्या से जुड़े अनुभवी लोगों से बात करें। दर हमेशा हमारे मन में रहता है। हो सकता है, कुछ बुरा हो भी जाए, पर होगा ही, ये जरूरी नहीं है। अपने डर को स्वीकार करें, पर हमेशा उसे अपने साथ ना रखें। 

3- अपनी परेशानी किसे बताएं 

कुछ लोगों की आदत होती है कि कोई Problem आने पर वो किसी से भी उसके बारे में बातचीत करना पसंद नहीं करते। पर, एक सच ये भी है कि कभी-कभी अपनी परेशानी किसी दूसरे को बता देने भर से ही मन हल्का हो जाता है। और, हो सकता है कि बातों ही बातों में उसका Solution भी निकल आए।

जब हम इस चिंता में पड़ जाते हैं कि हमारी तकलीफ के बारे में सुनकर बाकी लोग क्या सोचेंगे, कहीं मजाक तो नहीं उड़ाएंगे, या फिर हमारा और ज्यादा नुकसान तो नहीं हो जाएगा, इस तरह परेशानी कम होने की बजाय और ज्यादा बढ़ने लगती है। पूरी दुनिया के सामने अपनी परेशानी का ढिंढोरा ना पीटें। इसके विपरीत, अपने किसी दोस्त, family member या फिर ऐसे व्यक्ति जिस पर आप भरोसा करते हों उनके साथ अपनी problem को share करें।

ऐसा करने से मन में एक विश्वास आता है कि मुसीबत के समय हम अकेले नहीं हैं। कोई है, जो हमारा सहारा बनकर हमारे साथ खड़ा रह सकता है। इसलिए अपनी बातों को विश्वास लायक लोगों के साथ share करने से बिलकुल भी ना हिचकें। जो सच है वो कहें और अपनों से एक अच्छी राय जरूर लें। 

4- दुःख से कैसे बचें 

दुख हमें डराता है। उदासी हमें खलती है। हम इनसे बचना चाहते हैं। इसीलिए जब मूड खराब होता है, तो हम जितना जल्दी हो, उसे ठीक करने में लग जाते हैं। खुद को जल्दी खुश करने के लिए हम एक से दूसरे, दूसरे से तीसरे व्यक्ति या चीजों के पीछे भागते रहते हैं। दुखी होने पर खुश होने की और बेचैन होने पर शांत दिखने की कोशिश करते रहते हैं।

यहां एक बात याद रखना जरूरी है। किसी भी चीज की शुरुआत और उसका अंत दोनों मायने रखती है। कोई भी दुःख हो या किसी भी तरह की तकलीफ हो वो तब तक बनी रहती है, जब तक हम उसे पूरी तरह से अलविदा नहीं करते। किसी भी दुःख से जल्दी से उबरने की और सब कुछ ठीक करने की जल्दबाज़ी से कुछ हाथ नहीं आता। मन में छुपी भावनाएं लंबे समय तक हमें परशान करते रहती हैं। इसलिए तकलीफ को स्वीकार करना, उसका सामना करना जरूरी होता है।

कुछ दुख ऐसे भी होते हैं जो कभी नहीं जाते। लेकिन समय के साथ उस दुख से, उससे जुड़ी भावनाओं से हम संतुलन बनाना सीख जाते हैं। मनोविज्ञानी एमी जॉनसन कहती हैं, ‘हर चीज हमारे काबू में नहीं होती। ऐसा करने की कोशिश करना हमें तनाव में डाल देता है। हमें भरोसा रखना चाहिए कि उदासी के ये भाव हमेशा के लिए नहीं हैं, धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।’ 

5- एक दुनिया जो हम खुद बनाते हैं 
दुनिया किसी को नहीं छोड़ती। हम सभी की जिंदगी में कुछ लोग ऐसे जरूर होते हैं, जिनका काम टांग खिंचाई करना, हमारा मज़ाक उड़ाना, हमें पीछे धकेलना या फिर नुकसान पहुंचाना होता है। पर, दुनिया यहीं तक नही होती। इससे साथ-साथ एक दुनिया वो भी है, जो हम अपने साथ बनाते चलते हैं।

दूसरों की बातों पर ध्यान ना देकर, खुद के लिए जब हम कुछ करते हैं तो अपनी उस दुनिया को हम और बेहतर बनाते हैं। हर बार जब किसी मुसीबत या दुःख के बाद हम फिर से खड़े होते हैं, तो वो दुनिया और बड़ी और मज़बूत हो जाती है। ‘ए फेयरवेल टु आर्म्स’ में अर्नेस्ट हेमिंग्वे कहते हैं, ‘दुनिया हर किसी को तोड़ती है, उन्हीं में से बहुत सारे लोग हैं, जो टूटने के बाद और भी मजबूत हो जाते हैं।’

6- सीखने का सही मौका 

जब कोई आखिरी मिनट में बार-बार किसी योजना में बदलाव करता है, तो गुस्सा आना एक natural सी बात है। ऐसा होने पर हम शिकायतें करते हैं और आपस में कहासुनी होने लगती है। पर कई बार हमे सच में किसी बदलाव की जरूरत होती भी है। लेकिन तब क्या? जेन हेबिट के संस्थापक लिओ बॉबटा कहते है, ‘बदलावों से बचने की बजाय, हमें उन्हें कुछ नया सीखने का मौका समझना चाहिए।

इससे हमारे लिए हालात के अनुसार ढलना और अपना फोकस बनाए रखना आसान हो जाता है। किसी भी बदलाव से डरने की बजाय उसे आगे बढ़ने का रास्ता समझना हमें सफल बनाता है। बदलाव हमेशा नई चुनौती लाता है और चुनौती ही हमे कुछ नया सीखाती है। साथ ही जब किसी बदलाव से हमे कोई अच्छा result मिलता है तो हम मिलने वाले मौकों और साथ के लोगों के प्रति आभारी हो जाते हैं और उनसे बेहतर ढंग से जुड़ भी पाते हैं।’

इस माह इतना ही... अगले माह कुछ और…

नए सेशन की बहुत सारी बधाईयाँ

धन्यवाद

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार 

पुस्तकालयाध्यक्ष

G-20 SUMMIT QUIZ

 

G-20 SUMMIT QUIZ 

( MINISTRY OF EDUCATION )

       Quiz Banner


                          G20 Summit Quiz


                                   Start Date: 6 Dec 2022, 11:00 am

                                   End Date: 30 Apr 2023, 11:59 pm


TO PARTICIPATE

About Quiz

The G-20 Summit focuses on strengthening multilateral economic relations among developed and developing countries of the world. The focus area is to ensure the revival and recovery of the global economy, work towards ensuring financial stability and strengthen pathways for achieving Sustainable Development Goals. India will be hosting G-20 Summit in September 2023.

The Quiz questions are designed to increase your awareness about G-20 and its importance in promoting peace and harmony for progress and development.

The main objectives of the quiz competition are to –

1.   Create awareness about the historical background of the G-20 Summit

2.   Develop knowledge about the objectives of the Summit

3.   Promote understanding of its salient features and provisions

4.   Encourage children to relate to different parameters of G-20

 

G 20 शिखर सम्मेलन दुनिया के विकसित और विकासशील देशों के बीच बहुपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार और पुनर्प्राप्ति को सुनिश्चित करना, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मार्ग को मजबूत करना है।यह प्रश्नोत्तरी प्रगति और विकास के लिए शांति और सामंजस्य स्थापित्त करने हेतु G 20 के महत्व के बारे में आपकी जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार की गयी है।

यह प्रश्नोत्तरी G 20 के बारे में तथा प्रगति  और विकास के लिए शांति और सदभाव को बढ़ाने में इसके महत्व के विषय में आपकी जागरूकता को बढ़ाने  के लिए बनाई गयी है।

प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के  मुख्य उद्देश्य हैं –

1. G 20 शिखर सम्मेलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में जागरूकता पैदा करना

2. शिखर सम्मेलन के उद्देश्यों के बारे में ज्ञान विकसित करना

3. इसकी मुख्य विशेषताओं और प्रावधानों की समझ को बढ़ावा देना

4.  G 20 के विभिन्न मापदंडों से संबंधित करने के लिए प्रोत्साहित करना

CHATGPT

CHATGPT

Background

  • ChatGPT by OpenAI: Artificial Intelligence (AI) research company OpenAI recently announced ChatGPT, a prototype dialogue-based AI chatbot capable of understanding natural language and responding in natural language.

  • Will be able to implement in software soon: So far, OpenAI has only opened up the bot for evaluation and beta testing but API access is expected to follow next year. With API access, developers can implement ChatGPT into their own software.

  • Remarkable abilities: Even under its beta testing phase, ChatGPT’s abilities are already quite remarkable. Aside from amusing responses like the pumpkin one above, people are already finding real-world applications and use cases for the bot.

ChatGPT

What is Chatbot?

  • A chatbot (coined from the term “chat robot”) is a computer program that simulates human conversation either by voice or text communication and is designed to help solve a problem.

  • Organizations use chatbots to engage with customers alongside classic customer service channels like phone, email, and social media.

What is ChatGPT?

  • Simple definition: ChatGPT is a chatbot built on a large-scale transformer-based language model trained on a diverse dataset of text and capable of generating human-like responses to prompts.

  • A human-like language model: It is based on GPT-3.5, a language model that uses deep learning to produce human-like text.

  • It is more engaging with details: However, while the older GPT-3 model only took text prompts and tried to continue on that with its own generated text, ChatGPT is more engaging. It’s much better at generating detailed text and can even come up with poems.

  • Keeps the memory of the conversations: Another unique characteristic is memory. The bot can remember earlier comments in a conversation and recount them to the user.

  • Human-like resemblance: A conversation with ChatGPT is like talking to a computer, a smart one, which appears to have some semblance of human-like intelligence.

Will AI replace all of our daily writing?

  • ChatGPT is not entirely accurate: It is not entirely accurate, something even OpenAI has admitted. It is also evident that some of the essays written by ChatGPT lack the depth that a real human expert might showcase when writing on the same subject.

  • ChatGPT lacks depth like the human mind: It doesn’t quite have the nuance that a human can often provide. For example, when asked ChatGPT how one should cope with a cancer diagnosis. The responses were kind but generic. The type of responses you would find in any general self-help guide.

  • It lacks the same experiences as humans: AI has a long way to go. After all, it doesn’t have the same experiences as a human.

  • ChatGPT doesn't excel in code: ChatGPT writes basic code. As several reports have shown, ChatGPT doesn’t quite excel at this yet. But a future where basic code is written using AI doesn’t seem so incredible right now.

Limitations of ChatGPT

  • ChatGPT is still prone to Misinformation: Despite of abilities of the bot there are some limitations. ChatGPT is still prone to misinformation and biases, which is something that plagued previous versions of GPT as well. The model can give incorrect answers to, say, algebraic problems.

  • ChatGPT can write incorrect answers: OpenAI understands some flaws and has noted them down on its announcement blog that “ChatGPT sometimes writes plausible-sounding but incorrect or nonsensical answers.

Conclusion

  • OpenAI’s ChatGPT turned that simple experience into something entirely different. ChatGPT is a path-breaking example of an AI chatbot and what the technology could achieve when applied at scale. Limitations aside, ChatGPT still makes for a fun little bot to interact with. However, there are some challenges that need to be addressed before it becomes an unavoidable part of human life.

What is ChatGPT?

  • Simple definition: ChatGPT is a chatbot built on a large-scale transformer-based language model trained on a diverse dataset of text and capable of generating human-like responses to prompts.

  • A human-like language model: It is based on GPT-3.5, a language model that uses deep learning to produce human-like text.

  • It is more engaging with details: However, while the older GPT-3 model only took text prompts and tried to continue on that with its own generated text, ChatGPT is more engaging. It’s much better at generating detailed text and can even come up with poems.

  • Keeps the memory of the conversations: Another unique characteristic is memory. The bot can remember earlier comments in a conversation and recount them to the user.

  • Human-like resemblance: A conversation with ChatGPT is like talking to a computer, a smart one, which appears to have some semblance of human-like intelligence.

Capabilities of GPT-4

  • Enhanced abilities: GPT-4 is a considerable improvement over its predecessor, GPT-3.5, with enhanced conversational and creative abilities that allow it to understand and produce more meaningful and engaging content.

  • Accept both text and image input: It can accept both text and image input simultaneously, which enables it to consider multiple inputs while generating responses, such as suggesting recipes based on an image of ingredients.

  • Diverse potential: GPT-4’s impressive performance in various tests designed for humans, such as simulated bar examinations and advanced courses in multiple subjects, demonstrates its potential applications in diverse fields.

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INDIAN SCIENTISTS WHO CHANGED THE WORLD

National Science Day 2023

National Science Day 2023 by KV JANAKPURI

National Science Day 2023

भारत में प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस एक विशेष उत्सव के रूप मनाया जाता है। यह उस दिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है जब भारतीय भौतिक विज्ञानी सर सी. वी. रमन ने एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज की थी।

आज, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस रोजमर्रा के जीवन में विज्ञान के महत्व को प्रदर्शित करता है और नियमित लोगों को यह देखने का अवसर देता है कि कैसे वैज्ञानिक नवाचार जीवन को बेहतर बना सकते हैं और सामाजिक विकास को प्रोत्साहित कर सकते हैं।


राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2023 


# राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2023 की थीम 'वैश्विक भलाई के लिए वैश्विक विज्ञान' घोषित की गई है। 

# भारत सरकार ने 1986 में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (एनएसडी) के रूप में नामित किया था।

#  इस दिन सर सी.वी. रमन ने 'रमन प्रभाव' की खोज की घोषणा की जिसके लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 


रमन प्रभाव 

 रमन प्रभाव प्रकाश की तरंग दैर्ध्य में परिवर्तन है जो तब होता है जब अणुओं द्वारा प्रकाश किरण को विक्षेपित किया जाता है। जब प्रकाश की एक किरण किसी रासायनिक यौगिक के धूल रहित, पारदर्शी नमूने से होकर गुजरती है, तो प्रकाश का एक छोटा अंश आपतित (आने वाली) किरण के अलावा अन्य दिशाओं में निकलता है। इस बिखरे हुए प्रकाश का अधिकांश भाग अपरिवर्तित तरंग दैर्ध्य का होता है। हालांकि, एक छोटे हिस्से की तरंग दैर्ध्य घटना प्रकाश से भिन्न होती है; इसकी उपस्थिति रमन प्रभाव का परिणाम है। कौन थे सीवी रमन? चंद्रशेखर वेंकट रमन तमिलनाडु के एक भौतिक विज्ञानी थे। प्रकाश प्रकीर्णन के क्षेत्र में उनके काम ने उन्हें 1930 में भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार दिया। इस घटना को रमन प्रभाव के रूप में जाना जाता था। 1954 में, उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।


सीवी रमन

चंद्रशेखर वेंकट रमन तमिलनाडु के एक भौतिक विज्ञानी थे। प्रकाश प्रकीर्णन के क्षेत्र में उनके काम ने उन्हें 1930 में भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार दिया। इस घटना को रमन प्रभाव के रूप में जाना जाता था। 1954 में, उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।


राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समयरेखा 

# 1923 - ए थ्योरी इज़ बॉर्न - एडॉल्फ स्मेकल, एक ऑस्ट्रियाई भौतिक विज्ञानी, प्रकाश प्रभाव के प्रकीर्णन का वर्णन करता है, लेकिन यह अभी भी एक सिद्धांत है। 1928- टाइमिंग इज एवरीथिंग- रमन द्वारा अपने अब तक के प्रसिद्ध सिद्धांत को प्रकाशित करने से एक सप्ताह पहले, सोवियत भौतिक विज्ञानी ग्रिगोरी लैंड्सबर्ग और लियोनिद मैंडेलस्टम क्रिस्टल में प्रकाश प्रभाव के बिखरने का निरीक्षण करते हैं, लेकिन उन्होंने रमन की खोज के महीनों बाद अपने पेपर को प्रकाशित किया। जिस वजह से उनकी खोज को मान्यता प्राप्त नहीं है। 


# 1928 - वी हैव ए नेम - बर्लिन विश्वविद्यालय के भौतिकशास्त्री पीटर प्रिंगशाइम ने रमन के बिखरे हुए प्रकाश के सिद्धांत का पूरी तरह से अध्ययन और पुनरुत्पादन किया, इस प्रभाव को रमन प्रभाव कहा। 

# 1986 - एक प्रस्ताव आया - विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार के लिए राष्ट्रीय परिषद (एन.सी.एस.टी.सी.) ने विज्ञान और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार से 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस घोषित करने के लिए कहा। 


# 28 फरवरी, 1987 - पहला राष्ट्रीय विज्ञान दिवस - राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार परिषद विशेष राष्ट्रीय विज्ञान लोकप्रियता पुरस्कारों की घोषणा करके इस आयोजन को बढ़ावा देती है, जो विजेताओं को छात्रवृत्ति, अनुदान और अन्य पुरस्कार प्रदान करते हैं। 


राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का इतिहास 


# चंद्रशेखर वेंकट रमन, जिन्हें आमतौर पर सी.वी. के नाम से जाना जाता है वह एक प्रतिभाशाली विद्यार्थी थे। उन्होंने बहुत जल्दी स्कूल की पढ़ाई पूरी की, 11 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी की और 13 वर्ष की उम्र में अपनी उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी की, जिसके बाद 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी स्नातक की डिग्री प्राप्त की। 1917 में कलकत्ता के एक कॉलेज में अंततः उन्हें एक शिक्षण पद की पेशकश के बाद ही छोड़ना पड़ा।

 

# चार साल बाद, यूरोप की यात्रा पर, रमन ने पहली बार हिमखंडों और भूमध्य सागर के आकर्षक नीले रंग को देखा। वह यह पता नहीं लगा सके कि यह रंग कैसे प्रकट हुआ और उस समय के प्रचलित सिद्धांत का खंडन करने के लिए निकल पड़ें, जिसमें बताया गया था कि सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने पर बिखरता है, जिससे विभिन्न रंग दिखाई देते हैं। 


# रमन ने स्वयं प्रयोग करना शुरू किया, उन्होंने पता लगाया कि जब प्रकाश किसी पारदर्शी पदार्थ से होकर गुजरता है तो कुछ प्रकाश अलग-अलग दिशाओं में बिखरता हुआ निकलता है। 


# 1928 में प्रकाशित इन परिणामों ने वैज्ञानिक समुदाय को इतना प्रभावित किया कि रमन को उसी वर्ष नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की पूरी उम्मीद थी। उस वर्ष और अगले वर्ष उनकी अनदेखी की गई। हालांकि, अपनी खोज पर रमन का विश्वास डगमगाया नहीं और उन्हें खुद पर इतना यकीन था कि उन्होंने दो टिकट बुक किए - एक अपने लिए और एक अपनी पत्नी के लिए - स्टीमशिप पर जुलाई में स्टॉकहोम के लिए जब नोबेल पुरस्कार की घोषणा नवंबर में होगी। उन्होंने उस वर्ष भौतिकी में नोबेल पुरस्कार जीता, अपने काम और भारतीय वैज्ञानिक समुदाय पर ध्यान आकर्षित किया। 1999 से अब तक की 


राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम 

 

1999: हमारी बदलती धरती

2000: बुनियादी विज्ञान में फिर से रुचि पैदा करना

2001: सूचना प्रौद्योगिकी विज्ञान शिक्षा के लिए 

2002: वेल्थ फ्रॉम वेस्ट ·

2003: आईवीएफ के 25 साल और डीएनए के 50 साल

2004: समुदाय में वैज्ञानिक जागरूकता को प्रोत्साहित करना · 

2005: सेलिब्रेटिंग फिजिक्स · 

2006: हमारे भविष्य के लिए प्रकृति का पोषण करें 

2007: मोर क्रॉप पर ड्रॉप · 

2008: पृथ्वी ग्रह को समझना ·

2009: विज्ञान के विस्तार क्षितिज · 

2010: सतत विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी · 

2011: दैनिक जीवन में रसायन · 

2012: स्वच्छ ऊर्जा विकल्प और परमाणु सुरक्षा · 

2013: आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलें और खाद्य सुरक्षा ·

 2014: वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना · 

2015: राष्ट्र निर्माण के लिए विज्ञान ·

2016: राष्ट्र के विकास के लिए वैज्ञानिक मुद्दे · 

2017: विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी 

2018: एक स्थायी भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी

2019: विज्ञान लोगों के लिए, और लोग विज्ञान के लिए · 

2020: वीमेन इन साइंस · 

2021: एसटीआई का भविष्य: शिक्षा कौशल और कार्य पर प्रभाव ·

2022: सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण · 

2023: वैश्विक भलाई के लिए वैश्विक विज्ञान


भारत में पहला राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी 1987 को मनाया गया था। बता दें कि राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार परिषद विशेष राष्ट्रीय विज्ञान लोकप्रियता पुरस्कारों की घोषणा करके राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के आयोजन को बढ़ावा देती है, जो विजेताओं को छात्रवृत्ति, अनुदान और अन्य पुरस्कार प्रदान करते हैं।

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NEP 2020 by KV JANAKPURI

Prayas - February 2023

 

                                                      

Year - 3                         Month - February 2023                              Issue - 39

प्यारे बच्चों,

परीक्षा का मौसम फिर से आ गया, आप दिमागी कसरत करने के लिए अपने आपको तैयार करें। दिमागी कसरत शारीरिक कसरत से भिन्न होती है। हमारे देश में शतरंज ईजाद किया गया तो इसीलिए कि यह दिमाग की सबसे कठिन और जोरदार कसरत है। खैर शतरंज तो सभी नहीं खेलते हैं, लेकिन क्रासवर्ड पजल्स या कम्प्यूटर पर दिए गए गेम सालिटायर को तो लगभग सभी पसंद करते हैं। आप इनसे शुरुआत कर सकते हैं। आप यदि यह भी नहीं करना चाहते हैं तो आसान तरीका है साधारण स्तर के गुणा-भाग अथवा जोड़-घटाव करना।

हफ्ते में एक बार कोई कविता या जोक याद करने की कोशिश करें। इससे आपका दिमाग शेप में रहेगा और इसकी ताकत भी बढ़ेगी। हमेशा कुछ नया करने की सोच रखिए। नए-नए आइडियाज को सामने आने दें। इसके लिए एक बच्चे की तरह सोचना ही काफी है। बच्चे सकारात्मक ऊर्जा, विस्मित भाव और उत्सुकता से सोचते हैं।

अपने आपको दिवास्वप्न देखने दीजिए। इससे मस्तिष्क तीक्ष्ण होगा और उसकी ताकत भी बढ़ेगी। अपने आपको केवल एक ही व्यक्ति न बनने दें। एक ही व्यक्ति में बहुत सारे व्यक्तित्व पैदा कीजिए। जितने अधिक हो सकें, उतने तरीकों से सोचिए।आईये अब परीक्षा से भय के बारें में सोचते है ।

परीक्षा का भय


कई विद्यर्थियों को परीक्षा के बारे में सोचकर ही बेचैनी महसूस होने लगती है। मन में कई विचार घूमने लगते हैं, -'क्या मैं सभी प्रश्नों का उत्तर दे पाउंगा?' 'थोड़ा और पढ़ लेता तो अच्छा होता' आदि। ये विचार लगभग हर विद्यार्थी को परेशान करते हैं। थोड़ा-बहुत दबाव बेहतर प्रदर्शन के लिए मददगार होता है। इससे शरीर में एड्रिनलिन हारमोन स्त्रावित होता है जो व्यक्ति को सचेत और फोकस्ड बनाए रखता है।

हल्का तनाव या दबाव होना स्वाभाविक है लेकिन ज्यादा घबराहट परेशानी का सबब बन जाती है। यह व्यक्ति के चारों ओर एक नकारात्मक घेरा बना देती है और फिर वो एकाग्र होकर सोच-समझ नहीं पाता। इसका बुरा प्रभाव पड़ता है प्रदर्शन पर क्योंकि विद्यार्थी न तो प्रश्नों पर अपना ध्यान केंद्रित कर पाता है और न सटीक उत्तर ही दे पाता है। ऐसे कई उपाय हैं जिनसे परीक्षा का भय दूर किया जा सकता है ताकि विद्यार्थी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।

आईए अब परीक्षा से पहले क्या करने चाहिए ये देखते है ।


परीक्षा से पहले


अपना कोर्स समय रहते पढ़ लें और उसका रिविज़न भी कम से कम एक दिन पहले ही पूरा कर लें। ऐन वक्त तक पढ़ते रहने से तनाव बढ़ता है। चित्त स्थिर रखने और मन शांत करने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं, किसी को संगीत सुनने पर सुकून मिलता है तो किसी को व्यायाम करने से या फिर कुनकुने पानी से स्नान करना भी अच्छा तरीका हो सकता है। अपने लिए रिलेक्स करने का ऐसा ही कोई तरीका चुनें।

परीक्षा के दिन और उससे एक दिन पहले इस तरह के उपाय बहुत फायदेमंद साबित होते हैं। जो कुछ भी आपने पढ़ा है उसे याद रखने में ये सहायक होते हैं और आत्मविश्वास बढ़ताता है। एग्जाम सेंटर का रास्ता पता न होना भी घबराहट का कारण बन सकता है। इस बारे में पहले ही जानकारी जुटा लें और संभव हो तो एक बार खुद वहां जाकर देखें। इससे ऐन वक्त की हड़बड़ी से बच जाएंगे। परीक्षा के नियमों को ध्यान से पढ़ लें। परीक्षा से पहले की रात नींद पूरी करें।

अंत में परीक्षा के दौरान आपको किस प्रकार का व्यवहार रखना चाहिए इस पर चर्चा करना भी अनिवार्य है ।

परीक्षा के दौरान


'मुझे कुछ नहीं आता'। पढ़ाई नहीं की हो तो ये ख्याल परेशान कर सकता है लेकिन अच्छे से पढ़ने पर भी ऐसे विचार उत्पन्न होना घबराहट के संकेत हैं। तनाव के कारण विद्यार्थी ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। कई तो प्रश्न भी ठीक से नहीं पढ़ पाते हैं। इससे बचने के लिए ये उपाय कर सकते हैं-

- परीक्षा कक्ष में सही समय पर पहुंचें।


- कक्ष में पहुंचकर लंबी-गहरी सांसें लें और छोड़ें। घबराहट में अक्सर लोग ठीक से सांस नहीं लेते हैं। गहरी सांस लेते हुए अपनी पीठ एकदम सीधी कर लें।


- आपके सामने रखी किसी स्थिर निर्जीव वस्तु (दीवार, तस्वीर, आदि) की ओर देखकर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करें।


- मन में कोई सकारात्मक बात दोहराएं जैसे - मैं ये परीक्षा पास करने वाला हूं। 1-2 मिनिट तक यही दोहराते रहें और फिर सामान्य रुप से सांस लें। शांति अनुभव करेंगे।


- प्रश्नों को ध्यान से पढ़ें। यदि परीक्षा के बीच बीच फिर से घबराहट होने लगे तो फिर से एकाग्रता के उपाय दोहराएं।


- प्रश्नपत्र सॉल्व करने की रणनीति तय कर लें। कौनसे प्रश्न पहले सॉल्व करेंगे आदि और बिना समय बर्बाद किए उत्तर लिखना शुरु कर दें।


याददाश्त के टिप्स...

किसी भी बात को याद रखने के लिए दिमाग उस बात का अर्थ मूल्य और औचित्य के आधार पर तय करता है। दिमाग की प्राथमिकता भी इसी क्रम में काम करती है। याद रखने की सबसे पहली सीढ़ी है अर्थ जानना, अतः किसी भी बात को याद रखने से उसका अर्थ जरूर समझिए।

यदि अर्थ ही समझ में नहीं आया है तो रटने का कोई मतलब नहीं है। इसलिए पहले जिस बात या पाठ को याद रखना है, पहले उसका अर्थ समझिए, फिर उसका महत्व और मूल्य समझिए इसके बाद आपके जीवन में उस बात का क्या औचित्य है यह जानिए।

इस माह इतना ही... अगले माह कुछ और…

परीक्षा बहुत ही अच्छे से दें आपको इसके लिए खूब ढेर सारी शुभकामनाएं।

धन्यवाद

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार 

पुस्तकालयाध्यक्ष

Netaji Subhash Chandra Bose


विश्व इतिहास में 23 जनवरी 1897 (23rd January 1897) का दिन स्वर्णाक्षरों में अंकित है। इस दिन स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक सुभाषचंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) का जन्म कटक के प्रसिद्ध वकील जानकीनाथ तथा प्रभावती देवी के यहां हुआ था। उनके पिता ने अंगरेजों के दमनचक्र के विरोध में 'रायबहादुर' की उपाधि लौटा दी। इससे सुभाष के मन में अंगरेजों के प्रति कटुता ने घर कर लिया। 

अब सुभाष अंगरेजों को भारत से खदेड़ने व भारत को स्वतंत्र कराने का आत्मसंकल्प ले, चल पड़े राष्ट्रकर्म की राह पर। आईसीएस की परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद सुभाष ने आईसीएस से इस्तीफा दिया। इस बात पर उनके पिता ने उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा- 'जब तुमने देशसेवा का व्रत ले ही लिया है, तो कभी इस पथ से विचलित मत होना।' 
 
दिसंबर 1927 में कांग्रेस पार्टी (Congress) के राष्ट्रीय महासचिव (National secretary General) के बाद 1938 में उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) चुना गया। उन्होंने कहा था- मेरी यह कामना है कि महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के नेतृत्व में ही हमें स्वाधीनता की लड़ाई लड़ना है। हमारी लड़ाई केवल ब्रिटिश साम्राज्यवाद से नहीं, विश्व साम्राज्यवाद से है। धीरे-धीरे कांग्रेस से सुभाष का मोह भंग होने लगा। 
16 मार्च 1939 को सुभाष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सुभाष ने आजादी के आंदोलन को एक नई राह देते हुए युवाओं को संगठित करने का प्रयास पूरी निष्ठा से शुरू कर दिया। इसकी शुरुआत 4 जुलाई 1943 को सिंगापुर में 'भारतीय स्वाधीनता सम्मेलन' के साथ हुई। 
5 जुलाई 1943 को 'आजाद हिन्द फौज' का विधिवत गठन हुआ। 21 अक्टूबर 1943 को एशिया के विभिन्न देशों में रहने वाले भारतीयों का सम्मेलन कर उसमें अस्थायी स्वतंत्र भारत सरकार की स्थापना कर नेताजी ने आजादी प्राप्त करने के संकल्प को साकार किया।
12 सितंबर 1944 को रंगून के जुबली हॉल में शहीद यतीन्द्र दास के स्मृति दिवस पर नेताजी (Subhash Chandra Bose) ने अत्यंत मार्मिक भाषण देते हुए कहा- 'अब हमारी आजादी निश्चित है, परंतु आजादी बलिदान मांगती है। आप मुझे खून दो, मैं आपको आजादी दूंगा।' यही देश के नौजवानों में प्राण फूंकने वाला वाक्य था, जो भारत ही नहीं विश्व के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। 
16 अगस्त 1945 को टोक्यो के लिए निकलने पर ताइहोकु हवाई अड्डे पर नेताजी का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और 18 अगस्त (18 August 1945) को स्वतंत्र भारत की अमरता का जयघोष करने वाला, भारत मां के दुलारे नेताजी सुभाष चंद्र बोस सदा के लिए, राष्ट्रप्रेम की दिव्य ज्योति जलाकर अमर हो गए। 

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Prayas - january 2023

                                                      

Year - 2                          Month - January 2023                              Issue - 38

प्यारे बच्चों,

वैसे तो हर कार्य का अपना महत्व होता है लेकिन जिस काम को आसानी से किया जा सकता है उसके लिए कठिन मेहनत करना भी अपनी प्रतिभा के साथ बेमानी होता है वो कहते है ना जो दिमाग के तेज होते है वे हमेसा Smart Work का ही रास्ता चुनते है और यही उनका फैसला उन्हें सफलता के रास्ते पर ले जाती है और फिर वही उनके सफलता की एक नई कहानी भी बनती है.

तो चलिए एक छोटी सी कहानी जानते है जिससे आप सभी को Smart Work और Hard Work के अंतर को आसानी से समझ सकते है

एक बार की बात है एक जंगल में कुछ लोग मजदूरी पर लकड़िया काटने का काम करते है सबके काम के आधार मजूदरी मिलती थी जिससे वहा कुछ पुराने लोग जिन्हें लकड़ियों के काटने का अनुभव था वे बहुत ही अच्छे तरह से कार्य कर रहे थे जबकि वहा कुछ नये युवा भी काम पर लगे थे जो बहुत ही जोश के साथ कार्य करते थे.

लेकिन यह क्या पूरे दिन भर कार्य करने के बाद वह युवा लोग कुछ ही लकड़िया काट पाते थे जबकि पुराने अनुभवी लोगो का समूह उतने ही समय में बहुत ज्यादा लकड़िया काट लेते थे इससे उन युवाओ को बड़ा आश्चर्य होता था की हम सभी एक समान घंटे कार्य करते है जबकि ये लोग ज्यादा लकड़िया कैसे काट लेते है जिस कारण से वे उतने समय में ही ज्यादा पैसे भी कमाते थे.

फिर अपनी दुबिधा को दूर करने के लिए वे सारे युवा उन अनुभवी लोगो के पास गये और वही सवाल पूछा की हम सभी के लिए एक समान घंटे मिलते है लेकिन आप लोग उतने ही समय में कैसे ज्यादा मेहनत करके हम सभी से ज्यादा मजदूरी कमा लेते है.

तो उन अनुभवी लोगो के समझाया की इस दुनिया में किसी को काम को दो तरीके से किया जा सकता है पहला Hard Work और दूसरा Smart Work.

आप लोग हार्ड वर्क करते है ये अच्छी बात है और सफलता के लिए कठिन मेहनत करना जरुरी भी है लेकिन अगर अधिक से अधिक सफलता प्राप्त करना चाहते है तो थोडा हमे अलग सोचना चाहिए जिससे की उसी कार्य को Smart तरीके से भी किया जा सकता है.

एक तरफ जहा आप लोग 8 घंटे लगातार लकड़ी काटने का कार्य करते है जिससे की कुल्हाड़ी की धार कमजोर पड़ जाती है जिससे अधिक मेहनत करने पर भी कम ही लकड़ी काट पाते है.

जबकि हम लोग कुछ समय इन लकड़ियों की धार तेज करने में भी देते है जिससे की लकड़िया तेजी से और आसानी से कट सके जिसे हमे अपने अनुरूप मेहनत का फल भी मिलता है इसलिए हमे हार्ड वर्क के साथ साथ Smart Work पर भी ध्यान देना चाहिए जिससे की हमारा वह काम और भी आसान हो सकता है.

अब उन युवाओ को समझ आ चुका था की एक तरफ जहा शारीरिक ताकत के बल पर मेहनत कर रहे थे और यही यदि वे थोड़ा दिमाग भी लगाते तो उनका कार्य और भी  आसान हो सकता था इस तरह अब उन्हें कठिन मेहनत और Smart Work के बीच का फर्क समझ आ चुका था

कहानी से मिलने वाली शिक्षा

तो देखा आपने किस प्रकार यदि आप Hard Work करते है लेकिन थोडा सा दिमाग लगाते हुए उसी कार्य को स्मार्ट तरीके से Smart Work करते है वही काम बहुत आसान हो जाता है इसलिए आज के ज़माने में नये नये टेक्नोलॉजी आते जा रहे है ऐसे हम अपने कार्य को और भी आसान बना सकते है तो जरूरत होती है बस अपने दिमाग का उपयोग करते हुए उन कार्यो को करना

तो ऐसे में यदि हमे सफलता के पथ पर आगे बढना है तो हमे कठिन मेहनत के साथ दिमाग का भी उपयोग करना चाहिए की कैसे हम अपने कार्यो को करे की वह कार्य और भी आसान हो जाये,

इस माह इतना ही... अगले माह कुछ और…

नव वर्ष की शुभकामनाएं।

धन्यवाद

आपका पथ-प्रदर्शक 

धर्मेन्द्र कुमार 

पुस्तकालयाध्यक्ष